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विकास के मामले में उपेक्षित हो रहा हारोडीह
भास्कर न्यूज - गिरिडीह/मिर्जागंज
प्रखंड मुख्यालय से आठ किलोमीटर दूर स्थित हारोडीह गांव आजादी के दशकों बाद भी विकास के मामले में पिछले पायदान पर खड़ा है। यहां की सात सौ से अधिक आबादी को जनप्रतिनिधियों ने अब तक सिर्फ छलने का ही काम किया है। भूपतडीह से चितरडीह जाने वाली सड़क के ठीक किनारे बसे इस गांव के लोग अब भी विकास की उम्मीद लगाए बैठे हैं। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, सिंचाई, शिक्षा समेत अन्य मूल सुविधाएं लोगों को मयस्सर नहीं है। बात सड़क की करें तो हारोडीह से बंशीडीह जाने वाली कच्ची सड़क पूरी तरह जर्जर है। सड़क किनारे नाली नहीं रहने से कुएं व चापाकल का पानी कच्ची सड़क को और खऱाब कर रहा है। आलम यह है कि इस सड़क से होकर बंशीडीह, हारोडीह व नावाडीह जाने वाले लोगों को काफी फजीहतों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय मो शमीम अंसारी, हुसैनी मियां, जमीर अंसारी, मुमताज़ अंसारी व मंसूर अंसारी ने बताया कि विधायक चंद्रिका महथा व सांसद प्रतिनिधि नुनूलाल मरांडी बीते वर्ष यहां आए और सड़क की दुर्दशा देख शीघ्र इसकी मरम्मत कराने की बात कही थी। विधायक ने तो हारोडीह से बंशीडीह होते हुए श्याम सिंह नावाडीह तक पक्की सड़क बनवाने का आश्वासन भी दिया था। उक्त लोगों ने कहा कि इन नेताओं का आश्वासन कोरा ही साबित हुआ है। गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र नहीं रहने के कारण इलाज के लिए लोगों को जमुआ या गिरिडीह जाना पड़ता है। सिंचाई की सुविधा नहीं रहने के कारण प्रकृति की मेहरबानी पर किसान निर्भर हैं। प्राथमिक शिक्षा के आगे पढ़ाई करने के लिए छात्रों को आठ किलोमीटर दूर जमुआ जाना पड़ता है।
बिजली के पोल व तार तो जरुर राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत लगाए गए हैं मगर बिजली नाम मात्र के लिए ही कभी कभार जलती है। कुल मिलाकर यह कहना गलत नहीं होगा कि हारोडीह गांव में आजादी के इतने साल बीत जाने के बाद भी मुलभुत सुविधाओं का टोटा है।