हत्याकांड में दो कदम ही चली पुलिस
भास्कर न्यूज - बिरनी
कई थानेदार बदले गए। अरसा बीत गया। लेकिन, विकास के हत्यारे का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। विकास हत्याकांड भी नीरज हत्याकांड की तरह फाइलों में कैद है। स्कूली छात्र विकास कुमार वर्मा की हत्या को एक वर्ष बीतने को है। लेकिन, बिरनी पुलिस के हाथों में अपराधियों के खिलाफ एक तिनका भी नहीं लग पाया है। नतीजतन थक हारकर पुलिस मूकदर्शक बनकर तमाशा देख रही है। या फिर खुद व खुद हत्यारे के आने का इंतजार कर रही है। मालूम हो कि राजधनवार थाना क्षेत्र के सापामारन गांव निवासी दिलीप प्रसाद वर्मा के 12 वर्षीय पुत्र विकास कुमार वर्मा अपने मामा के घर बिरनी थाना के नवादा गंाव में रहकर पढ़ाई करता था। 23 जनवरी 2013 की शाम स्कूल से आने के बाद पेंसिल खरीदने के लिए घर से निकल कर बरहमसिया चौक पर गया था। देर शाम तक घर नहीं आने पर उसकी खोजबीन शुरू की गई। लेकिन, कहीं कोई पता नहीं चलने पर इसकी सूचना थाने को दीया गई थी। इधर विकास की लाश बीते 31 जनवरी के अहले सुबह बरहमसिया के बगल एक अद्र्ध निर्मित कूप में पाया गया था। इस मामले में बिरनी थाना में कांड संख्या 13/13 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
लेकिन घटना के एक वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक बिरनी पुलिस को कामयाबी नहीं मिली है।
जल्द होगी गिरफ्तारी
॥विकास कुमार वर्मा का हत्यारा जल्द ही गिरफ्तार होगा। इस मामले का चर्च मिलते ही गहन पड़ताल शुरू की जाएगी। किसी भी सूरत में हत्यारे को बख्शा नहीं जाएगा।ञ्जञ्ज
राणा प्रताप सिंह, थानेदार, बिरनी
माले के अल्टीमेटम का नहीं दिखा असर
गरीब गुरबों की बातें करने वाली भाकपा माले ने हत्याकांड के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आंदोलन चलाया था। सनद रहे कि विकास कुमार वर्मा की हत्या के बाद माले ने हत्यारे की गिरफ्तारी को लेकर सड़क जाम के साथ बिरनी थाने की घेराबंदी की थी। साथ ही चेतावनी मार्च निकाल कर प्रशासन को अल्टीमेटम दिया था। माले के अल्टीमेटम को भी साल भर बीत गए। लेकिन विकास का हत्यारा पुलिस के हाथ नहीं लग सका।
23 जनवरी 2013 की शाम से गायब विकास का कुएं से मिला था शव