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खुखरा के अस्थाई थाना ने काम करना शुरू किया
भास्कर न्यूज - गिरिडीह
गिरिडीह के नक्सल प्रभावित पीरटांड़ के खुखरा सीआरपीएफ कैंप में पूर्व से बने पुलिस पिकेट को थाना में बदलने की डीजीपी राजीव कुमार घोषणा के बाद बुधवार से पिकेट अस्थाई थाना के रूप में काम करने लगा है। शुरूआती दौर में खुखरा में निर्माणाधीन सीआरपीएफ कैंप में ही खुखरा का नया अस्थाई थाना संचालित होगा। जबकि नए थाना भवन निर्माण के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट राच्य पुलिस मुख्यालय को भेजी जाएगी। एसपी क्रांति कुमार गडि़़देशी ने नए थाना प्रभारी के रूप में रंजीत रोशन को नियुक्त किया है। सूत्रों की मानें तो नियुक्ति से संबधित प्रकिया जारी है। खुखरा और नक्सलवाद के मसले पर बुधवार को एसपी ने पुलिस लाईन में बैठक भी की। नए थाना प्रभारी के रूप में रंजीत रोशन का नाम आने के पीछे मुख्य कारण यह माना जा रहा है कि वर्ष २०१२ के अंतिम महीने में रंजीत रोशन को निमियाघाट थाना प्रभारी का चार्ज सौंपा गया था। अपने १६ माह के कार्यकाल में उन्होंने सीआरपीएफ व जिला पुलिस की संयुक्त एलआरपी के दौरान निमियाघाट के आसपास के क्षेत्रों में भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद किया था। रंजीत रोशन को मिली गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में लैंडमाइंस और भारी मात्रा में जिलेटिन बरामद हुआ था।
पूर्व में जो छोड़ चुके हैं गांव
नक्सलियों के डर से वैश्य परिवारों से शिवनारायण राम, श्रीकृष्ण राम, वासुदेव राम, सखीचंद्र राम, दुलारचंद्र राम, बैजनाथ राम, दशरथ किशोर वर्णवाल, रामनारायण राम, सरयू राम, गोविंद राम, अर्जुन राम, रामदयाल राम, रामस्वरूप राम, रामचंद्र राम ने घर खुखरा छोड़ दिया है। इसी तरह अगड़ी जाति से बजरंग प्रसाद, शिव प्रसाद, भागवत प्रसाद और यदुनंदन प्रसाद ने भी जमीन-जगह नक्सलियों के हवाले कर गांव छोड़ दिया। खाली मकान सहित गांव छोड़ चुके लोगों की जमीन पर नक्सलियों का कब्जा है। इन संपत्तियों को खरीद चुके लोगों को भी नक्सलियों ने गांव से खदेड़ दिया है। अब गांव में छोटा-मोटा धंधा या खेती करने वाले ही बचे हैं।
॥रंजीत रोशन को खुखरा का पहला और नया थाना प्रभारी बनाया गया है। फिलहाल सीआरपीएफ कैंप में ही नया थाना संचालित होगा। जबकि थाना भवन निर्माण के लिए गिरिडीह पुलिस राच्य मुख्यालय को प्रोजेक्ट रिपोर्ट जल्द भेजेगी। उम्मीद है कि नए थाना भवन का निर्माण जल्द करा लिया जाएगा।ञ्जञ्ज
क्रांति कुमार गढि़देशी, एसपी, गिरिडीह
नक्सली उठाते रहे हैं भौगोलिक बनावट का फायदा
भौगालिक बनावट का फायदा अब तक इस क्षेत्र में सक्रिय नक्सली दस्ते का हार्डकोर जोनल कमंाडर अजय महतो उठाता आया है। जबकि उसका कई मारक दस्ता खुखरा के कई क्षेत्रों में सक्रिय रह कर हिंसक घटनाओं को अंजाम देता आया है। अपने मजबूत नेटवर्क के बूते ही पुलिस के हर इनपुट की गुप्त सूचना जोनल कमंाडर अजय को मिलती रही है। इसका भी पुख्ता प्रमाण वर्ष २०१३ है जब जिले के पूर्व एसपी अमोल वेणुकांत होमकर को यह गुप्त सूचना मिली थी कि पालगंज के घने जंगलों से होते हुए अजय महतो अपने दस्ते के साथ गुजरने वाला है। उस वक्त भी जबरदस्त चक्रव्यूह तैयार कर पुलिस ने अजय और उसके दस्ते को पकडऩे का प्रयास किया था। लेकिन इसी मजबूत नेटवर्क के जरिए अजय व उसका दस्ता पुलिस पकड़ से बच निकला। पीरटाड़ समेत खुखरा में हाल के दिनों में बढ़ी नक्सली वारदातों को रोकने और इस पूरे क्षेत्र को नक्सलवाद से मुक्त कराने के लिए ही डीजीपी राजीव कुमार ने खुखरा पुलिस पिकेट को थाना के रूप में बदलने की घोषणा की थी। जबकि खुखरा का नवोदित थाना पीरटांड़ की आठ पंचायतों को मिला कर अलग किया गया है।
खुखरा रहा है नक्सलियों का गढ़
गिरिडीह से 50 किमी दूर पीरटांड़ के खुखरा गांव नक्सलियों का गढ़ रहा है। कभी पीरटांड़ की सबसे बड़ी ग्रामीण मंडी खुखरा पुलिस की तेज हुई गतिविधियों के बाद भी वीरान है। चहल-पहल से आबाद रहे इस गांव की समस्या का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि गांव को को 21 परिवारों ने माओवादियों की दहशत से अलविदा कह दिया है। दरअसल, यहां वर्षों से माओवादियों की हुकूमत रही है। नक्सली वारदातों के निशान यहां चप्पे-चप्पे पर हंै। नक्सलियों के खिलाफ बने सनलाइट सेना का सफाया खुखरा में ही हुआ। 14 अप्रैल 1991 को इसी गांव में सनलाइट सेना के लोग बैठक कर रहे थे। तभी नक्सलियों ने हमला कर सेना के छह प्रमुख लोगों की हत्या कर संगठन का सफाया ही कर दिया था।
रंजीत रोशन बनाए गए पहले थानेदार अभी पिकेट में ही चलेगा थाना
राज्य पुलिस मुख्यालय को भेजी जाएगी नए थाना भवन निर्माण की प्रोजेक्ट रिपोर्ट: एसपी