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गांव के युवा श्रमदान कर बना रहे हैं सरिया-राजधनवार सड़क
> स्वयंसेवी संस्था रोशनी केंद्र ने दिया मार्गदर्शन
परमानंद - सरिया ((गिरिडीह))
रास्ते के अभाव में टापूनुमा बनकर रह गए सरिया प्रखंड क्षेत्र के एक गांव की सूरत कुछ युवाओं के अथक प्रयास से संवर गई। स्वयंसेवी संस्था रोशनी केंद्र के मार्गदर्शन से गांव ने एक नया सवेरा देखा। उक्त गांव को सरिया-राजधनवार मुख्य मार्ग से जोड़ दिया गया। जिससे सिर्फ पोटमा ही नहीं, बल्कि कई अन्य गांव भी लाभान्वित हुए। ज्ञात हो कि सरिया प्रखंड क्षेत्र के सबलपुर पंचायत अंतर्गत पोटमा एक ऐसा गांव था, जहां जाने के लिए सीधे कोई सड़क मार्ग नहीं था। वहां जाने के लिए या तो नावाडीह के रास्ते या फिर फकिरापहरी के रास्ते जाना पड़ता था। जिसमें कई किमी का चक्कर बेफजूल में लगाना पड़ता था।
मगर गांव वालों के पास इसके अलावा कोई दूसरा उपाय भी नहीं था। वहां के ग्रामीण इसे अपनी नियति मान बैठे थे। 1200 की आबादी वाले उक्त गांव में लगभग 100 से अधिक परिवार रहते हैं। वहां शिक्षा के लिए एक प्राथमिक विद्यालय व एक आंगनाबाड़ी केंद्र भी है। इसके बावजूद वहां के लोगों को एक रास्ता नहीं था, सीधे शहर से जुडऩे के लिए। नब्बे फीसदी लोगों की आजीविका कृषि पर आधारित है और कृषि से उत्पादित अनाजों को बाजार तक लाने के लिए रास्ते के अभाव में इन्हें कठोर परिश्रम और दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। तब उक्त गांव के युवाओं ने गांव को रास्ता देने के लिए कमर कसा और युवाओं ने पंकज प्रसाद के नेतृत्व में एक संस्था बनाई। आखिरकार यही संस्था गांव की तकदीर संवारने में सूत्रधार बनी। इसका सभी स्वागत कर रहे हैं।
खुद लग गए ग्रामीण निर्माण कार्य में
गांव के युवा रोशनी केंद्र के संचालक तथा सभी ग्रामीणों ने स्वयं कुदाल उठाया और खेत के बीचोंबीच दस फीट चौड़ी सड़क का निर्माण किया। गांव को सीधे सरिया-राजधनवार मुख्य मार्ग से जोड़ दिया। सड़क के लिए तरस रहे ग्रामीणों को एक बहुत बड़ा तोहफा मिल गया। उक्त सड़क निर्माण हो जाने से अब सिर्फ पोटमा ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के अन्य कई गांव जैसे फकिरापहरी, सबलपुर, उर्रो, झरहा, जैसे गांव भी सीधे मुख्य मार्ग से जुड़ जाएंगे। काम को अंजाम तक पहुंचानेवालों में मुख्य रूप से पंकज प्रसाद, संजय वर्मा, रामचंद्र पासवान, संजय पासवान, रंजीत रविदास, टुपलाल महतो, बासुदेव महतो, नागेश्वर महतो, विनोद रविदास, चांदो रविदास, बुधन महतो, फुलचंद महतो, अशोक, महेंद्र रविदास, गिरधारी महतो, जगरनाथ, राजेश वर्मा, यशोदा देवी समेत अन्य लोग शामिल थे।
संस्था से रोशन हुई ग्रामीणों की चेतना
ग्रामीणों ने संस्था का नाम रोशनी केंद्र दिया है। साथ ही इस संस्था को पंजीकृत भी करवाया। इसके बाद गांव में एक वृहत बैठक बुलाई गई। जिसमें गांव के सभी लोग सम्मिलित हुए। बैठक में युवाओं ने सभी के बीच गांव से शहर को सीधे जोडऩे वाली सड़क बनाने का प्रस्ताव रखा। इसके लिए ग्रामीणों को इस रास्ते में पडऩे वाली अपनी जमीन व खेतों के कुछ हिस्सों को त्याग करना पड़ेगा। साथ ही आर्थिक मदद भी करने की बात कही। लोगों में जमीन के हिस्से देने को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी है। युवाओं व रोशनी केंद्र के संचालकों ने उन्हें इससे होने वाले लाभ और इससे गांव के भविष्य के उज्जवल होने की बात समझाए जाने पर लोग खेतों के टुकड़े देने को तैयार हुए। साथ ही उन्होंने इस पुनीत कार्य के लिए आर्थिक मदद व श्रमदान का भी निर्णय लिया।
सड़क के लिए ग्रामीणों ने दी अपनी जमीन