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मुशायरा और खानकाही कव्वाली का आयोजन

8 वर्ष पहले
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जमुआ. प्रख्यात सूफी संत बाबा सलीम शाह चिश्ती अफीउल्लाही इफ्तेखारी के दूसरे उर्स के मौके पर आयोजित ख्वाजा गरीब नवाज कांफ्रेंस के पहले दिन बनाने फजर कुरआन रवानी रात्रि में मुशायरा और खानकाही कव्वाली का आयोजन किया गया।
शायरों ने कौमी एकता और वतनपरस्ती से लबरेज कई श़ेर पढ़े और वातावरण को वतनपरस्ती के जच्चे से सराबोर कर दिया। नफरत के कीटाणु को जड़ से मिटाना होगा। पैगामे मुहब्बत जमाने को सुनाना होगा, हर चंद शुदा रंग से है लेकिन हम एक हैं जिसके आवाम लगाना होगा। धरती ए हिंद मुहब्बत की अदा मांगे है, खून शहीदों का इकरारे वफा मांगे है। जर्रे-जर्रे में पोशीदा है अजब खुशबू की बागे जन्नत भी भारत की हवा मांगे है। जिन्हें सलीके नहीं मयकशी के हाथ उसी के पैमाने लगे हैं सरीखे कई शेर पढ़े। साथ ही बच्चा वाहिद चिश्ती और बच्चा सैफ चिश्ती के बीच कव्वाली का मुकाबला काफी दिलचस्प लगा। आयोजन में इफ्तेखार हक सलीम उर्फ शेखू के अलावा सूफी मो इकबाल सलीमी, मुस्तकीम सलीमी, मो समशुल सलीमी, मो इकबाल सलीमी, मो मंसूर, डॉ अशोक द्विवेदी, कंचन कुमार, विधु विनोद, गयासुद्दीन अंसारी, अरुण एल्बर्ड, अब्र्दुरज्जाक आदि मौजूद थे।