अफसरों का कामकाज में नहीं लगता मन
कोई दोपहर में आते हैं तो किसी के दिन भर नहीं होते दर्शन
कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कार्यालयों में तालाबंद जैसी स्थिति
समाचार के साथ फोटो देखें। 22 बोकारो 118 से 122 में।
कैप्शन-फोटो संख्या 118 में अनुमंडल कार्यालय में पसरा सन्नाटा, 119 में अंचल अधिकारी के कार्यालय पर लटका ताला, 120 में प्रखंड नजारत में ताला बंद, 121 में नगर परिषद पदाधिकारी का खाली चैंबर और 122 में रजिस्ट्री आफिस में खाली पड़ी कुर्सियां।
राजेश सिंह देव - बोकारो
12 बजे तक लेट नहीं दो बजे के बाद भेंट नहीं... सरकारी कार्यालयों की यह कहावत अब पुरानी हो गई। अब तो साहबों के दिन दिन भर दर्शन नहीं होते हैं। दूर-दराज से अपने काम के लिए आने वाले लोगों के लिए अब अफसरों के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं। चास अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न कार्यालयों में अधिकारी पदस्थापित तो हैं, लेकिन कामकाज में इनका मन नहीं लगता। कोई अफसर 12 बजे के बाद आता है, तो कोई दिन भर नहीं आता, लेकिन इसे देखने वाला कोई नहीं। जिले के आला अधिकारियों को इससे कोई मतलब नहीं है कि प्रखंड, अंचल और नगर परिषद के कामकाज कैसे हो रहे हैं। काम काज में अधिकारी कितनी रूचि लेते हैं। बुधवार को सरकारी कार्यालयों का हाल जानने के लिए दैनिक भास्कर ने विभिन्न कार्यालयों का मुआयना किया। पेश है रिपोर्टर राजेश सिंह देव और फोटो जर्नलिस्ट अभिषेक कुमार की सरकारी कार्यालयों से लाइव रिपोर्ट।
तीन बजे तक नहीं आए नगर परिषद अधिकारी
चास नगर परिषद कार्यालय में सुबह 10 बजे से तीन बजे तक मुआयना किया गया। लेकिन नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण कुमार नहीं आए। 10.30 बजे प्रधान सहायक और कुछ कर्मचारी आए। नगर परिषद में ठेकेदारों का आना जाना लगा रहा। कुछ लोग जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने भी आए, वे कार्यालय में आवेदन जमा कर वापस चले गए। कार्यालय में आने वाले लोग चर्चा कर रहे थे कि जिस कार्यालय में अधिकारी का ही अता पता नहीं है, वहां से प्रमाण पत्र कैसे और कब बनेगा। इसकी कोई गारंटी नहीं है। कर्मचारियों ने बताया कि समाहरणालय में बैठक है, इसलिए साहब नहीं आए हैं। जबकि नियमत: अधिकारी को पहले अपने कार्यालय आने के बाद ही बैठक में भाग लेने जाना है। इसके विपरीत चास के बीडीओ विजेंद्र कुमार सुबह कार्यालय आने के बाद बैठक में भाग लेने गए और तीन बजे पुन: अपने कार्यालय आ गए, कार्यपालक दंडाधिकारी महावीर सिंह भी बैठक में भाग लेने के बाद दो बजे अनुमंडल कार्यालय पहुंच गए थे। लेकिन नगर परिषद अधिकारी आए ही नहीं।
11.45 बजे आए अंचल अधिकारी
प्रखंड सह अंचल कार्यालय में कर्मचारियों की हड़ताल के कारण लगभग सभी कार्यालय के दरवाजे बंद थे। नए बीडीओ विजेंद्र कुमार 10 बजे कार्यालय आकर मनरेगा कर्मियों के साथ बैठक कर रहे थे। दूसरी ओर अंचल अधिकारी के चैंबर में ताला लटक रहा था। अंचल निरीक्षक राजेश कुमार अपने कार्यालय में बैठे थे। अंचल अधिकारी राम नरेश सोनी 11.45 बजे कार्यालय पहुंचे। लेकिन प्रखंड और अंचल कार्यालय में आम आदमी का कोई काम नहीं हो रहा था। प्रखंड और अंचल दोनों के नजारत में ताला लटका हुआ था। प्रखंड के जनसेवकों का कार्यालय भी बंद था। यहां के अनुसचिवीय कर्मचारी हड़ताल पर हैं, लेकिन कार्यालय में दो चपरासी के अलावा और कोई कर्मचारी नजर नहीं आ रहे थे। जन सेवक और राजस्व कर्मचारी भी हड़ताल का फायदा उठाते हुए कार्यालय से नदारत थे। प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी अशोक कुमार भी दिन भर नजर नहीं आए। उनके कार्यालय में भी ताला लटका हुआ था।
सन्नाटा छाया रहता है अनुमंडल कार्यालय में
चास अनुमंडल कार्यालय में सन्नाटा छाया रहता है। अनुमंडल पदाधिकारी डा. संजय कुमार विधि व्यवस्था के लिए ज्यादा समय समाहरणालय और अपने गोपनीय कार्यालय में देते हैं। वे अनुमंडल कम आते हैं। अनुमंडल न्यायालय में मामलों की सुनवाई भी कार्यपालक दंडाधिकारी महावीर सिंह करते हैं। जबकि डीसीएलआर संदीप कुमार डीसी के ओएसडी और कई अन्य पदों के प्रभार में होने के कारण समाहरणालय में ही ज्यादा समय देते हैं। वहीं कार्यपालक दंडाधिकारी पूनम कच्छप छुट्टी में हैं। वहीं बाबू लोग हड़ताल में हैं। कुल मिलकर सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक अनुमंडल कार्यालय में सन्नाटा छाया रहा। दोपहर दो बजे कार्यपालक दंडाधिकारी महावीर सिंह अनुमंडल कार्यालय आए। वे न्यायालय के मामलों की सुनवाई करने के लिए आए थे। दूसरी ओर अनुमंडल कार्यालय परिसर में स्थित निबंधन कार्यालय के कर्मचारी भी हड़ताल पर चले गए हैं। इसके कारण दोपहर 12 बजे तक अवर निबंधक उज्जवल मिंज भी नहीं आए थे। कुछ अनुबंध कर्मी थे। उन्होंने बताया कि हड़ताल के कारण जमीन रजिस्ट्री का काम बंद है।
कैसे होगा जनता का काम
कर्मचारी हड़ताल हैं और अधिकारी नदारत। यहां जनता का काम क्या होगा। जनता की समस्याओं को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं। इनकी लापरवाही के कारण गरीबों को सरकारी योजनाओं का लाभ तो मिल ही नहीं रहा है, आय-आवासीय प्रमाण पत्र बनाने में भी जनता को सौ पापड़ बेलने पड़ते हैं।
पिंकी देवी, मुखिया, गोड़ाबालीडीह पंचायत।
सभी कार्यालयों में तालाबंद है
जमीन का दाखिल खारिज कराने अंचल कार्यालय आए थे। यहां तो अधिकारी हैं न कर्मचारी। सभी कार्यालयों में तालाबंद है। 12 बजे सीओ साहब आए उनसे मिले तो उन्होंने कहा कि राजस्व कर्मचारी से मिलो। कार्यालय में राजस्व कर्मचारी आते ही नहीं है तो उन्हें कहां खोजें। ये सब काम पंचायत कार्यालय में होना चाहिए था।
दिनेश महली, निवासी बाबूडीह गांव।
लगा रहे हैं कार्यालयों का चक्कर
पिता रंगलाल पांडेय सीएमसी अस्पताल वैल्लोर में भर्ती हैं। वे बीपीएल कार्डधारी हैं। उनके इलाज के लिए सरकार से सहायता लेनी है। सरकारी सहायता के लिए बीपीएल सूची का सत्यापन कर उपायुक्त कार्यालय में जमा करना है। लेकिन पिछले एक माह से कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं। कुछ काम नहीं हो रहा है। अब तो कर्मचारी हड़ताल पर हैं। कैसे बनेगा पता नहीं।
उपेंद्र नाथ पांडेय, निवासी कांड्रा गांव।
नहीं मिल रहे हैं कर्मचारी
नियोजन के लिए जाति, आय और आवासी प्रमाण पत्र बनाने के लिए एक सप्ताह से कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। आवेदन पर राजस्व कर्मचारी की अनुशंसा करानी है। लेकिन कर्मचारी नहीं मिल रहे हैं। राजस्व कर्मचारी कार्यालय आते ही नहीं हैं। कार्यालय के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। अधिकारी भी नहीं है। प्रमाण पत्र कैसे बनेगा पता नहीं।
मनोहर कोड़ा, निवासी काशीझरिया गांव।
क्या कहते है लोग
॥कर्मचारी हड़ताल हैं और अधिकारी नदारत। यहां जनता का काम क्या होगा। जनता की समस्याओं को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं। इनकी लापरवाही के कारण गरीबों को सरकारी योजनाओं का लाभ तो मिल ही नहीं रहा है, आय-आवासीय प्रमाण पत्र बनाने में भी जनता को सौ पापड़ बेलने पड़ते हैं। पिंकी देवी, मुखिया, गोड़ाबालीडीह पंचायत।
॥जमीन का दाखिल खारिज कराने अंचल कार्यालय आए थे। यहां तो अधिकारी हैं न कर्मचारी। सभी कार्यालयों में तालाबंद है। 12 बजे सीओ साहब आए उनसे मिले तो उन्होंने कहा कि राजस्व कर्मचारी से मिलो। कार्यालय में राजस्व कर्मचारी आते ही नहीं है तो उन्हें कहां खोजें। ये सब काम पंचायत कार्यालय में होना चाहिए था। दिनेश महली, निवासी बाबूडीह गांव।
॥पिता रंगलाल पांडेय सीएमसी अस्पताल वैल्लोर में भर्ती हैं। वे बीपीएल कार्डधारी हैं। उनके इलाज के लिए सरकार से सहायता लेनी है। सरकारी सहायता के लिए बीपीएल सूची का सत्यापन कर उपायुक्त कार्यालय में जमा करना है। लेकिन पिछले एक माह से कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं। कुछ काम नहीं हो रहा है। अब तो कर्मचारी हड़ताल पर हैं। कैसे बनेगा पता नहीं। उपेंद्र नाथ पांडेय, निवासी कांड्रा गांव।
॥नियोजन के लिए जाति, आय और आवासी प्रमाण पत्र बनाने के लिए एक सप्ताह से कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। आवेदन पर राजस्व कर्मचारी की अनुशंसा करानी है। लेकिन कर्मचारी नहीं मिल रहे हैं। राजस्व कर्मचारी कार्यालय आते ही नहीं हैं। कार्यालय के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। प्रमाण पत्र कैसे बनेगा पता नहीं। मनोहर कोड़ा, निवासी काशीझरिया गांव।
सन्नाटा छाया रहता है
अनुमंडल कार्यालय में
चास अनुमंडल कार्यालय में सन्नाटा छाया रहता है। अनुमंडल पदाधिकारी डा. संजय कुमार विधि व्यवस्था के लिए ज्यादा समय समाहरणालय और अपने गोपनीय कार्यालय में देते हैं। वे अनुमंडल कम आते हैं। अनुमंडल न्यायालय में मामलों की सुनवाई भी कार्यपालक दंडाधिकारी महावीर सिंह करते हैं। जबकि डीसीएलआर संदीप कुमार डीसी के ओएसडी और कई अन्य पदों के प्रभार में होने के कारण समाहरणालय में ही ज्यादा समय देते हैं। वहीं कार्यपालक दंडाधिकारी पूनम कच्छप छुट्टी में हैं। वहीं बाबू लोग हड़ताल में हैं। कुल मिलकर सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक अनुमंडल कार्यालय में सन्नाटा छाया रहा। दोपहर दो बजे कार्यपालक दंडाधिकारी महावीर सिंह अनुमंडल कार्यालय आए। वे न्यायालय के मामलों की सुनवाई करने के लिए आए थे। दूसरी ओर अनुमंडल कार्यालय परिसर में स्थित निबंधन कार्यालय के कर्मचारी भी हड़ताल पर चले गए हैं। इसके कारण दोपहर 12 बजे तक अवर निबंधक उज्जवल मिंज भी नहीं आए थे। कुछ अनुबंध कर्मी थे। उन्होंने बताया कि हड़ताल के कारण जमीन रजिस्ट्री का काम बंद है।
प्रखंड सह अंचल कार्यालय में कर्मचारियों की हड़ताल के कारण लगभग सभी कार्यालय के दरवाजे बंद थे। नए बीडीओ विजेंद्र कुमार 10 बजे कार्यालय आकर मनरेगा कर्मियों के साथ बैठक कर रहे थे। दूसरी ओर अंचल अधिकारी के चैंबर में ताला लटक रहा था। अंचल निरीक्षक राजेश कुमार अपने कार्यालय में बैठे थे। अंचल अधिकारी राम नरेश सोनी 11.45 बजे कार्यालय पहुंचे। लेकिन प्रखंड और अंचल कार्यालय में आम आदमी का कोई काम नहीं हो रहा था। प्रखंड और अंचल दोनों के नजारत में ताला लटका हुआ था। प्रखंड के जनसेवकों का कार्यालय भी बंद था। यहां के अनुसचिवीय कर्मचारी हड़ताल पर हैं, लेकिन कार्यालय में दो चपरासी के अलावा और कोई कर्मचारी नजर नहीं आ रहे थे। जन सेवक और राजस्व कर्मचारी भी हड़ताल का फायदा उठाते हुए कार्यालय से नदारत थे। प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी अशोक कुमार भी दिन भर नजर नहीं आए। उनके कार्यालय में भी ताला लटका हुआ था।
11.45 बजे आए अंचल अधिकारी
दिन के 12 बजे भी चास अनुमंडल कार्यालय के एक अधिकारी का चैंबर था खाली, अपने कार्यालय से गायब रहे कर्मचारी एवं विभिन्न कार्यालयों में पसरा रहा सन्नाटा।
राजेश सिंह देव - बोकारो
12 बजे तक लेट नहीं दो बजे के बाद भेंट नहीं... सरकारी कार्यालयों की यह कहावत अब पुरानी हो गई। अब तो साहबों के दिन दिन भर दर्शन नहीं होते हैं। दूर-दराज से अपने काम के लिए आने वाले लोगों के लिए अब अफसरों के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं। चास अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न कार्यालयों में अधिकारी पदस्थापित तो हैं, लेकिन कामकाज में इनका मन नहीं लगता। कोई अफसर 12 बजे के बाद आता है, तो कोई दिन भर नहीं आता, लेकिन इसे देखने वाला कोई नहीं। जिले के आला अधिकारियों को इससे कोई मतलब नहीं है कि प्रखंड, अंचल और नगर परिषद के कामकाज कैसे हो रहे हैं। काम काज में अधिकारी कितनी रूचि लेते हैं। बुधवार को सरकारी कार्यालयों का हाल जानने के लिए दैनिक भास्कर ने विभिन्न कार्यालयों का मुआयना किया। पेश है रिपोर्टर राजेश सिंह देव और फोटो जर्नलिस्ट अभिषेक कुमार की सरकारी कार्यालयों से लाइव रिपोर्ट।
तीन बजे तक नहीं आए
नगर परिषद अधिकारी
चास नगर परिषद कार्यालय में सुबह 10 बजे से तीन बजे तक मुआयना किया गया। लेकिन नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण कुमार नहीं आए। 10.30 बजे प्रधान सहायक और कुछ कर्मचारी आए। नगर परिषद में ठेकेदारों का आना जाना लगा रहा। कुछ लोग जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने भी आए, वे कार्यालय में आवेदन जमा कर वापस चले गए। कार्यालय में आने वाले लोग चर्चा कर रहे थे कि जिस कार्यालय में अधिकारी का ही अता पता नहीं है, वहां से प्रमाण पत्र कैसे और कब बनेगा। इसकी कोई गारंटी नहीं है। कर्मचारियों ने बताया कि समाहरणालय में बैठक है, इसलिए साहब नहीं आए हैं। जबकि नियमत: अधिकारी को पहले अपने कार्यालय आने के बाद ही बैठक में भाग लेने जाना है। इसके विपरीत चास के बीडीओ विजेंद्र कुमार सुबह कार्यालय आने के बाद बैठक में भाग लेने गए और तीन बजे पुन: अपने कार्यालय आ गए, कार्यपालक दंडाधिकारी महावीर सिंह भी बैठक में भाग लेने के बाद दो बजे अनुमंडल कार्यालय पहुंच गए थे। लेकिन नगर परिषद अधिकारी आए ही नहीं।
कोई दोपहर में आते हैं तो किसी के दिन भर नहीं होते दर्शन
कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कार्यालयों में तालाबंद जैसी स्थिति