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डाउनलोड करेंबोकारो. तेल एवं प्राकृतिक गैस सरंक्षण पखवाड़ा के तहत ओएनजीसी की ओर से साइकिल रैली निकाली गई। रैली को ओएनजीसी के अधिशासी निदेशक सीबीएम के राष्ट्रीय प्रमुख एके मिश्रा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। साइकिल रैली के माध्यम से केंद्रीय विद्यालय नंबर एक के छात्रों ने शहर के विभिन्न जगहों पर घूमकर उर्जा सरंक्षण का संदेश दिया।
इस दौरान सीबीएम के राष्ट्रीय प्रमुख मिश्रा ने कहा कि सीबीएम प्रोजेक्ट झारखंड में तेल एवं प्राकृतिक गैस के रूप में वैकल्पिक उद्योग के रूप में आ रहा है। झारखंड के बोकारो, झरिया, नार्थ कर्णपुरा में आगामी चार वर्षों के अंदर गैस का दोहन करने के लिए ४०० कुएं बनाए जाएंगे। यानि प्रतिवर्ष १०० कुएं बनाने की योजना है। हर कुएं के लिए ढ़ाई एकड़ जमीन की जरुरत होगी।
बीएसएल को भी की जा रही आपूर्ति
ओएनजीसी सीएनजी बनाकर बोकारो स्टील प्लांट को भी गैस की आपूर्ति कर रहा है। पर्वतपुर में सात साइड के लिए ५० एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया है। गैस का दोहन करने के लिए नए स्थानों का चयन कर लिया गया है। २५ वर्षों तक गैस का दोहन किया जाना है।
गैस दोहन में आस्ट्रेलिया के डॉट एनर्जी नामक कंपनी को ३५ प्रतिशत शेयर दिया गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देश पर गाडिय़ों के प्रदूषण की भी जांच की जाएगी। इससे परोक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। हाल ही में नियोजन के लिए लिखित परीक्षा ली गई थी।
गैस निकालने के बाद उस स्थान से कोयला निकालने के लिए कोल इंडिया या बीसीसीएल को टेंडर दिया जाएगा। इस मौके पर ओएनजीसी के निगमित सामाजिक दायित्व प्रमुख राजीव प्रसाद, लोकेशन मैनेजर परमानंद सिन्हा, ब्लॉक मैनेजर के महाप्रबंधक एनके पुंजरथ, मुख्य अभियंता बीके चौधरी आदि मौजूद थे।
तेल एवं प्राकृतिक गैस सरंक्षण पखवाड़ा के तहत ओएनजीसी की ओर से साइकिल रैली निकाली गई। रैली को ओएनजीसी के अधिशासी निदेशक सीबीएम के राष्ट्रीय प्रमुख एके मिश्रा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। साइकिल रैली के माध्यम से केंद्रीय विद्यालय नंबर एक के छात्रों ने शहर के विभिन्न जगहों पर घूमकर उर्जा सरंक्षण का संदेश दिया। इस दौरान सीबीएम के राष्ट्रीय प्रमुख मिश्रा ने कहा कि सीबीएम प्रोजेक्ट झारखंड में तेल एवं प्राकृतिक गैस के रूप में वैकल्पिक उद्योग के रूप में आ रहा है। झारखंड के बोकारो, झरिया, नार्थ कर्णपुरा में आगामी चार वर्षों के अंदर गैस का दोहन करने के लिए ४०० कुएं बनाए जाएंगे। यानि प्रतिवर्ष १०० कुएं बनाने की योजना है।
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