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कब्रिस्तान की जमीन खोदी, ग्रामीणों ने रोका काम

8 वर्ष पहले
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: ग्रामीणों ने बतौर वसूला 11 हजार रुपया जुर्माना
भास्कर न्यूज - मिहिजाम
दुमका में बन रहे 220 हजार केवीए क्षमता वाले पावर ग्रिड के लिए रूपनारायणपुर स्थित पिठाक्यारी पावर ग्रिड से दुमका ले जाए जा रहे हाई टेंशन बिजली आपूर्ति लाइन के लिए हाई टेंशन टावर लगाने का सैकड़ों ग्रामीणों ने बागजोरी के निकट विरोध कर दिया है। इससे लाइन ले जाने का कार्य बुधवार दोपहर बाद से बंद है। ग्रामीणों ने जेसीबी मशीन को भी अपने कब्जे में ले लिया है। जियाजोरी पंचायत के बागजोरी भंडारी टोला के ग्रामीणों में श्यामलाल सोरेन, धर्मेंद्र भंडारी, मिलन हेम्ब्रम, राजीव टुडू, विमल हेम्ब्रम, सुशील मरांडी, आदि के अनुसार जेसीबी लगाकर जिस जगह हाई टेंशन टावर लगाने के लिए गड्ढ़े खोदे गए है वहां आदिवासियों का प्राचीन कब्रगाह है। टॉवर लगाने के लिए दूसरे रास्ते का प्रयोग किया जाना चाहिए कब्रिस्तान के रास्ते टावर नहीं ले जाने दिया जाएगा। जो गड्ढ़े खोदे गए हैं उससे कब्रिस्तान में दबी लाशों को नुकसान पहुंचा है। कब्र लाश दबाने के लिए होती है न कि उसे खोद कर लाश निकालने के लिए। इसलिए पुन: कब्र ढंक दिया जाय और 50 हजार रुपए हर्जाना दिया जाय। तब काम करने दिया जाएगा अन्यथा हमारी लाश पर काम होगा। करीब 3 एकड़ जमीन पर यह कब्रगाह है। जिसमें कमारटोला, भंडारी टोला, चोरकट्टा के आदिवासी ग्रामीण इस्तेमाल करते है। अब पंचायत में निर्णय होगा।
ग्रामीणों व लाइन इंचार्ज ने सुलझाया मसला - दोपहर बाद ग्रामीणों व जेसीबी मालिक विनय सिंह और लाइन इंचार्ज के साथ हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जेसीबी मालिक ग्रामीणों को 11 हजार रुपए बतौर जुर्माना देंगे। साथ ही खोदी गई जगह को दुबारा गड्ढे खोद कर लाश को सुरक्षित दबा दिया जाएगा। साथ ही दूसरे रास्ते से टावर ले जाया जाएगा।



लाइन इंचार्ज को घेरे ग्रामीण, कब्रिस्तान पर विरोध करते ग्रामीण।



दुमका में बन रहे ग्रिड के ट्रांसमिशन लाइन के लिए टावर लगाने का किया जा रहा है कार्य

जानकारी नहीं होने से हुई गलती :ट्रांसमिशन इंचार्ज

रूपनारायणपुर-दुमका ट्रांसमिशन इंचार्ज रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि यह कार्य झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड का है। जो एलएनटी द्वारा कराया जा रहा है। सर्वे के दौरान यह बात पता नहीं चला की यहां श्मशान है। गलती हुई है कब्र को पुन: ढंक दिया जाएगा और दूसरे रास्ते से काम किया जाएगा। जनवरी 2013 से कार्य शुरू हुआ है जिसे इसी वर्ष अप्रैल तक समाप्त करना है। मुआवजे की राशि की जो मांग की जा रही है वह मेरे क्षेत्राधिकार में नहीं है। उच्चाधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।