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गयास की कहानियों में है जीवन की बारीकियां : पाठक
: जलेस ने दी कथाकार गयास अहमद गद्दी को श्रद्धांजलि
भास्कर न्यूज . झरिया
मनुष्य अपनी सीमाओं को पार कर जब दूसरे जीव में प्रवेश करता है तो वही जीव प्रतीक के रूप में हमारे अंदर के भावों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन जाता है। ये बातें सुप्रसिद्ध उपन्यासकार मनमोहन पाठक ने शनिवार को झरिया के हेठली बांध स्थित पीस एंड ग्वाय विद्यालय में कहीं। जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित श्री पाठक उर्दू साहित्य के ख्याति प्राप्त कथाकार गयास अहमद गद्दी की 29वीं पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। स्व. गयास अहमद गद्दी की तस्वीर पर माल्यार्पण कर साहित्यकारों, पत्रकार, कवियों और बुद्धिजीवियों ने माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम की अध्यक्षता अशोक अग्रवाल व संचालन तैयब खान ने किया। पाठक ने अपने संस्मरणों में गयास अहमद गद्दी की विभिन्न कहानियों पर चर्चा की। कहा कि गयास अहमद गद्दी एक ऐसे कथाकार थे जो जीवन की बारीकियों को अपने कहानियों में बड़े ही कलात्मक और सहज भाषा में व्यक्त करते थे। गोष्ठी में गयास साहब की सुप्रसिद्ध कहानी तजदा तजदा का पाठ कथाकार गयास अकमल ने किया। परिचर्चा में इम्तियाज अजीज, अशोक कुमार, शरीफ रजा, कृपा शंकर प्रसाद, जियाउर्रहमान, मास्टर मुख्तार खान, इकबाल अहमद गद्दी, गाविंद नाथ शर्मा, गंगाशरण शर्मा, जनकदेव जनक आदि थे।