साधना और ग्लैमर का चोली दामन का साथ
लोक गीतों से मालिनी ने दिलाया दर्शकों को मिट्टी की सुगंध
सूर संध्या पर लोक नृत्य की रही धूम
फोटो फाइल संख्या-27 बोकारो 176 और 177 में।
कैप्शन-कार्यक्रम प्रस्तुत करती मालिनी अवस्थी।
भास्कर न्यूज - बोकारो
किसी भी कलाकार के लिए साधना और ग्लैमर एक साथ चलते हैं। क्योंकि ग्लैमर और साधना का चोली दामन का साथ होता है। ग्लैमर पहले भी था और आज भी है। बस उसको देखने का नजरिया अपना अपना होता है। यह बातें देश की प्रसिद्ध अवधि व भोजपुरी गायिका मालिनी अवस्थी ने भास्कर संवाददाता से बात करते हुए कही। बनारस निवासी व गुरू गिरजा देवी की शिष्या अवस्थी ने पारंपरिक लोक गीत पर खुलकर बात की। जो कलाकार अपने सुर व गीतों से श्रोताओं को बांध लें वही सही मायनों में कलाकार है। हर पांच साल के बाद समय के साथ समाज की सोच बदलती जा रही है। लेकिन जो सादगी और पारंपरिक लोक गीतों में है, वह हमेशा रहेगा। अपने कैरियर में फिल्मों में न जाने के विषय में कहा कि मेरा जीवन का उद्देश्य स्पष्ट है। भारतीय पारंपरिक लोक गीतों को मुझे आगे ले जाना है। सुर संग्राम में बच्चों को दिए जा रहे अवसर की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि यह एक अच्छा प्लेटफार्म है। जहां बच्चों को अपने पारंपरिक लोक गीतों को जानने एवं अपनी प्रतिभा को दिखाने का अवसर मिल रहा है। इससे छोटे-छोटे व ग्रामीण इलाकों में छीपी प्रतिभा सामने आ रही है।
भाषा को मिले सम्मान
अपनी मातृभाषा के सम्मान के लिए हम सभी को अपने घर से शुरुआत करनी होगी। तभी जाकर हम अपनी भारतीय संस्कृति को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकेंगे। इस मामले में भोजपुरी भाषा को अभिभावक अपने बच्चों को सिखाने में गर्व महसूस कर रहे हैं। ये काफी उत्साहजनक है।
नए एलबम
मालिनी अवस्थी ने बताया कि एचएमवी के साथ मिलकर भोजपुरी एवं अवधि भाषा में 60 गानों का नया एलबम तैयार किया जायेगा। जिसपर फरवरी से कार्य होगा। उन्होंने प्रवासी भारतीयों के लिए अपने नए गाने बटोहिया भईया, सुंदर सू भूमि, भईया भारत के देशवा रे जो 26 जनवरी को रिलीज किया गया था।
दिखाई भारतीय संस्कृति की झलक
बोकारो इस्पात द्वारा आयोजित सुर संध्या कार्यक्रम में प्रसिद्ध लोक गीतों की गायिका मालिनी अवस्थी ने अवधि व भोजपुरी गीतों की शानदार प्रस्तुती से भारतीय लोक गीतों व परंपरा को दिखाया। सईंया मिले लड़कईयां में का करूं मैं, वैरन पिया को ले जाये रे, कचौड़ी गली में सुन कई बलमा गीत की प्रस्तुती से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं देवी गीत सोहर, चैती व होली के गीतों से दर्शकों को झूमने पर विवश कर दिया।
भाषा को मिले सम्मान
अपनी मातृभाषा के सम्मान के लिए हम सभी को अपने घर से शुरुआत करनी होगी। तभी जाकर हम अपनी भारतीय संस्कृति को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकेंगे। इस मामले में भोजपुरी भाषा को अभिभावक अपने बच्चों को सिखाने में गर्व महसूस कर रहे हैं। ये काफी उत्साहजनक है।
नए एलबम
मालिनी अवस्थी ने बताया कि एचएमवी के साथ मिलकर भोजपुरी एवं अवधि भाषा में 60 गानों का नया एलबम तैयार किया जायेगा। जिसपर फरवरी से कार्य होगा। उन्होंने प्रवासी भारतीयों के लिए अपने नए गाने बटोहिया भईया, सुंदर सू भूमि, भईया भारत के देशवा रे जो 26 जनवरी को रिलीज किया गया था।
दिखाई भारतीय संस्कृति की झलक
बोकारो इस्पात द्वारा आयोजित सुर संध्या कार्यक्रम में प्रसिद्ध लोक गीतों की गायिका मालिनी अवस्थी ने अवधि व भोजपुरी गीतों की शानदार प्रस्तुती से भारतीय लोक गीतों व परंपरा को दिखाया। सईंया मिले लड़कईयां में का करूं मैं, वैरन पिया को ले जाये रे, कचौड़ी गली में सुन कई बलमा गीत की प्रस्तुती से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं देवी गीत सोहर, चैती व होली के गीतों से दर्शकों को झूमने पर विवश कर दिया।
भास्कर न्यूज - बोकारो
किसी भी कलाकार के लिए साधना और ग्लैमर एक साथ चलते हैं। क्योंकि ग्लैमर और साधना का चोली दामन का साथ होता है। ग्लैमर पहले भी था और आज भी है। बस उसको देखने का नजरिया अपना अपना होता है। यह बातें देश की प्रसिद्ध अवधि व भोजपुरी गायिका मालिनी अवस्थी ने भास्कर संवाददाता से बात करते हुए कही। बनारस निवासी व गुरू गिरजा देवी की शिष्या अवस्थी ने पारंपरिक लोक गीत पर खुलकर बात की। जो कलाकार अपने सुर व गीतों से श्रोताओं को बांध लें वही सही मायनों में कलाकार है। हर पांच साल के बाद समय के साथ समाज की सोच बदलती जा रही है। लेकिन जो सादगी और पारंपरिक लोक गीतों में है, वह हमेशा रहेगा।
अपने कैरियर में फिल्मों में न जाने के विषय में कहा कि मेरा जीवन का उद्देश्य स्पष्ट है। भारतीय पारंपरिक लोक गीतों को मुझे आगे ले जाना है। सुर संग्राम में बच्चों को दिए जा रहे अवसर की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि यह एक अच्छा प्लेटफार्म है।
लोक गीतों से मालिनी ने दिलाई दर्शकों को मिट्टी की सुगंध