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इस गर्मी में भी नहीं बुझेगी चास के लोगों की प्यास
कहां से आएगा पानी
दामोदर नदी से
इस साल की गर्मी में चास के लोगों को चास जलापूर्ति योजना से पानी मिल सकेगा?
जिला प्रशासन का प्रयास है कि इस वर्ष की गर्मी में चास जलापूर्ति योजना से चास की जनता को पानी मिल जाए। एजेंसी को फरवरी तक का समय दिया गया है।
गर्मी तक जलापूर्ति प्रारंभ नहीं होने पर एजेंसी पर कार्रवाई करेंगे ?
बिल्कुल एजेंसी को फरवरी तक का समय दिया गया है। एजेंसी ने 15 दिन का समय और मांगा है। एजेंसी को इस बात पर समय दिया जाएगा कि वह अपना परफार्मेंस दिखाए। अगर काम समय पर पूरी नहीं होगा तो एजेंसी पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उमाशंकर सिंह, उपायुक्त
सीधी बात
पानी टंकी निर्माण कार्य में लगे मजदूर।
2008 में प्रारंभ हुआ योजना का कार्य
वर्ष 2002 में बने डीपीआर वाले चास जलापूर्ति योजना का कार्य वर्ष 2008 में प्रारंभ हुआ। इसके बावजूद सरकार की उदासीनता के कारण कछुए की चाल चलते हुए यह योजना अभी तक अधूरी पड़ी हुई है। वर्ष 2034 में यहां की जनसंख्या 180992 मानी गई है। जहां विभाग को जलापूर्ति करना है।
पिछले चार दशक से पानी की समस्या से परेशान जनता को राहत दिलाने के लिए 1977 में पहली बार विधायक बनने के बाद समरेश सिंह ने चास पेयजलापूर्ति योजना का प्रस्ताव तत्कालीन बिहार सरकार को दिया था। उस समय इस योजना का डीपीआर 40 लाख रुपये का बना था, लेकिन योजना स्वीकृत होने के बजाय हर दो-तीन साल में इसकी समीक्षा होती रही और वर्ष 2006 में इस योजना के लिए 34 करोड़ 22 लाख का डीपीआर बना। दो साल विलंब से दिसंबर 2008 में इस योजना की प्राक्कलित राशि बढ़ाकर लगभग 45 करोड़ कर इसकी निविदा निकाली गयी। निविदा लेने वाली एक मात्र कंपनी विश्वा इंफ्रास्ट्रक्चर एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने 10 प्रतिशत अधिक दर पर निविदा डाला था, इसलिए कार्य शुरू होने तक इस योजना की प्राक्कलित राशि लगभग 50 करोड़ हो गयी।
त्र40 लाख से 50 करोड़ की हुई योजना
चास शहरी क्षेत्र के लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी देने के लिए पीएचईडी विभाग ने चास जलापूर्ति योजना की डीपीआर बनाया था। यह डीपीआर वर्ष 2002 में बनाया गया था। जिसमें वर्ष 2034 तक की अनुमानित जनसंख्या को मानकर योजना बनाई गई है। वर्ष 2013 का अप्रैल माह बीतने को है लेकिन अभी तक यह योजना पूर्ण नहीं हुई।
वर्ष 2034 तक का
बना है डीपीआर
चास की आबादी एक लाख 41 हजार 618 लोगों के लिए हर दिन कम से कम 40 लाख गैलन पानी की जरूरत है, लेकिन प्रशासन एक लाख गैलन पानी भी चास की जनता को उपलब्ध नहीं करा पाता। बताया जाता है कि 80 के दशक में बोकारो इस्पात के साथ जिला प्रशासन का करार हुआ था कि बीएसएल प्रतिदिन चास की जनता को एक लाख गैलन पानी देगा, गर्मी में पानी की किल्लत को देखते हुए कम ही सही बीएसएल 50-60 हजार गैलन पानी चास स्थित पेयजल विभाग के टंकी में भेज देता है, दूसरी ओर पेयजल विभाग द्वारा चास में छह डीप बोरिंग कराए गये हैं, उनमें से 20-30 हजार गैलन पानी प्रतिदिन निकलता है, वही पानी नगरपालिका द्वारा चास की जनता को आपूर्ति की जाती है। कुल मिलकर देखा जाय तो प्रशासन जनता को पानी के नाम पर ऊंट के मुंह में जीरा दे रहा है।
जरूरत है 50 लाख गैलन की, ...लेकिन
मिलता नहीं है एक लाख गैलन
इस योजना में प्रतिदिन दो करोड़ 40 लाख लीटर पानी स्टॉक करने की क्षमता है। इसके लिए शहर के विभिन्न जगहों पर चार टंकी बनानी है, साथ ही 92 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाना, इसमें लगभग 18 किलोमीटर मेन पाइप लाइन व 74 किलोमीटर वितरण के लिए पाइपलाइन बिछाना है। साथ ही एक इंटेक वेल व एक जलशोध संस्थान बनाना है। इसके अलावा बिजली व मोटर का भी काम है।
चास शहर के सभी गलियों में पानी पहुंचाया जाएगा। लोगों को मानक के मुताबिक मिलेगा पानी।
क्या होना है काम
क्या मिलेगा लाभ
आनंद - बोकारो
चास की बहुप्रतीक्षित जलापूर्ति योजना फरवरी में भी प्रारंभ नहीं हो पाएगी। जबकि इस योजना को मार्च 2013 में ही प्रारंभ कर देना था। सूबे के पीएचईडी मंत्री जयप्रकाश पटेल के अलावा उपायुक्त उमाशंकर सिंह ने एजेंसियों को फरवरी 2014 में चास जलापूर्ति योजना को प्रारंभ करने का निर्देश दिया था। परंतु अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह योजना अभी तक पूर्ण नहीं हो सकी। मतलब चास के लोगों की प्यास इस गर्मी में भी नहीं बुझ सकेगी। अभी भी चास जलापूर्ति का कार्य कच्छप गति से चल रहा है। चास जलापूर्ति योजना के लिए दामोदर नदी में पाइप बिछाया जा रहा है। इस पाइप का कनेक्शन दामोदर नदी में बने कुआं से होगा जो जलापूर्ति का मुख्य स्रोत होगा। जालीदार पाइप से पानी छनकर ट्रीटमेंट प्लांट में पहुंचेगा, फिर पानी का ट्रीटमेंट होने के बाद उसे जलापूर्ति के लिए विभिन्न पानी टंकियों को भेज दिया जाएगा।
अभी तक पूर्ण नहीं हुआ पाइप कनेक्शन का कार्य
जलापूर्ति योजना के लिए पाइप बिछाया गया है। परंतु अभी तक इन पाइप को एक दूसरे के साथ कनेक्ट नहीं किया गया है। इतना ही नहीं चास के सभी कालोनियों में पाइप भी नहीं बिछाया गया है। इससे चास के सभी लोगों को पानी उपलब्ध नहीं हो पाएगा। काम की धीमी गति से यहां के आम लोग आक्रोशित हैं।
अधिकारी केवल मुआयना करने में लगे
काम कच्छप गति से चल रहा, मंत्री के आदेश का भी नहीं दिख रहा कोई असर
चास जलापूर्ति योजना के चालू होने में अभी और लगेगा वक्त
क्षमता - १ लाख 90 हजार
जनसंख्या - 139178
डीपीआर - ३० साल
लागत - 50 करोड़ रु.
योजना - वर्ष 2013 में
फैक्ट फाइल