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ग्रामीण डाक कर्मियों को डाक बीमा की दी जानकारी

7 वर्ष पहले
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> बैठक में करीब ५० ग्रामीण डाक कर्मियों ने लिया भाग
भास्कर न्यूज - जामताड़ा
आमलोगों को बीमा का महत्व बताने, आकस्मिक दुर्घटना के दौरान होने वाले लाभ व उन्हें जागरूक करने के उद्देश्य से बुधवार को गांधी मैदान स्थित क्लब में ग्रामीण डाक कर्मियों की बैठक हुई। करीब 50 ग्रामीण डाक कर्मियों की उपस्थिति हुई। इस अवसर पर अनुमंडलीय डाक निरीक्षक सिकंदर प्रधान, ओवरसियर भोलानाथ दुबे, गौतम कुमार व ग्रामीण डाक सेवक आशीष चक्रवर्ती की उपस्थिति हुई।
ग्रामीण डाक कर्मियों को उदाहरण देते भोलानाथ दूबे ने कहा कि हर सामान का मेल किसी दुकान में रहता है तो उस दुकान में अपेक्षा से अधिक ग्राहकों की भीड़ भी जुटती है। वहीं विश्वास पर भी दुकान चलती है। दुकान समय पर खोले जाने से उस दुकान व दुकानदार की शाख बढ़ जाती है। उक्त बातें भारतीय डाक विभाग के ग्रामीण ब्रांच ऑफिस के लिए भी सटीक बैठती है।
बीमा संबंधी योजनाओं की रखें सटीक जानकारी - ग्रामीण डाक घरों में कार्यरत कर्मियों को चाहिए कि आधुनिकता की होड़ में बने रहने के लिए बीमा संबंधी सारी योजनाओं की सटीक जानकारी रखें। निवेश सुरक्षित रहेगी की भावना ग्राहकों में जगेगी तो वे स्वत:: डाक घर आकर बीमा कराने के प्रति सचेष्टता दिखाएंगे। उन्होंने डाक कर्मियों को सुझाव दिया कि समय पर कार्यालय खोलें। वहीं बीमा संबंधी योजनाओं के बारे में जनता को बारीकी से बताएं। ऐसा कर ही ग्रामीण डाक बीमा के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। वहीं ओवरसियर गौतम कुमार ने डाक कर्मियों से उद्बोधन के दौरान कहा कि अधिकार व कर्तव्य को समझने की जरूरत है। सवालिया लहजे में उपस्थित डाक कर्मियों से पूछा कि भारतीय डाक विभाग 1995 से बीमा कार्य को शुरू किया है अभी तक आप सबों ने कितना इंटेंसिव कमाया है। उन्होंने उपस्थित डाक कर्मियों से बीमा के बारे में पूछा। एक भी कर्मी उत्तर नहीं दे सके। इस पर चुटकी लेते ओवरसियर गौतम ने कहा कि बीमा के बारे में स्वयं नहीं जानते हैं तो लोगों को क्या बताएंगे। उन्होंने संक्षिप्त में बीमा के बारे में बताते कहा कि यह लंबी समयावधि तक रुपए निवेश करने की योजना है। भारत सरकार ग्रामीण डाक बीमा योजना को प्रत्येक गांव के जन-जन तक पहुंचाना चाहती है। उन्होंने कहा कि जितनी भी बीमा कंपनियां कार्यरत हैं उनका पंचायत स्तर पर कार्यालय नहीं है । लेकिन डाक विभाग का पंचायत स्थित कार्यालय में ही लोगों को बीमा की सुविधा मिलेगी।




दुकान व दुकानदार की शाख बढ़ जाती है। उक्त बातें भारतीय डाक विभाग के ग्रामीण ब्रांच ऑफिस के लिए भी सटीक बैठती है।

बीमा संबंधी योजनाओं की रखें सटीक जानकारी - ग्रामीण डाक घरों में कार्यरत कर्मियों को चाहिए कि आधुनिकता की होड़ में बने रहने के लिए बीमा संबंधी सारी योजनाओं की सटीक जानकारी रखें। निवेश सुरक्षित रहेगी की भावना ग्राहकों में जगेगी तो वे स्वत:: डाक घर आकर बीमा कराने के प्रति सचेष्टता दिखाएंगे। उन्होंने डाक कर्मियों को सुझाव दिया कि समय पर कार्यालय खोलें। वहीं बीमा संबंधी योजनाओं के बारे में जनता को बारीकी से बताएं। ऐसा कर ही ग्रामीण डाक बीमा के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। वहीं ओवरसियर गौतम कुमार ने डाक कर्मियों से उद्बोधन के दौरान कहा कि अधिकार व कर्तव्य को समझने की जरूरत है। सवालिया लहजे में उपस्थित डाक कर्मियों से पूछा कि भारतीय डाक विभाग 1995 से बीमा कार्य को शुरू किया है अभी तक आप सबों ने कितना इंटेंसिव कमाया है। उन्होंने उपस्थित डाक कर्मियों से बीमा के बारे में पूछा। एक भी कर्मी उत्तर नहीं दे सके। इस पर चुटकी लेते ओवरसियर गौतम ने कहा कि बीमा के बारे में स्वयं नहीं जानते हैं तो लोगों को क्या बताएंगे। उन्होंने संक्षिप्त में बीमा के बारे में बताते कहा कि यह लंबी समयावधि तक रुपए निवेश करने की योजना है। भारत सरकार ग्रामीण डाक बीमा योजना को प्रत्येक गांव के जन-जन तक पहुंचाना चाहती है। उन्होंने कहा कि जितनी भी बीमा कंपनियां कार्यरत हैं उनका पंचायत स्तर पर कार्यालय नहीं है । लेकिन डाक विभाग का पंचायत स्थित कार्यालय में ही लोगों को बीमा की सुविधा मिलेगी।



डाक विभाग के पास 10 हजार रुपए की है न्यूनतम बीमा योजना

ग्रामीण डाक जीवन बीमा न्यूनतम 10 हजार के बीमा कर बीमित परिवार के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाती है। डाक विभाग ही ऐसा है जो लोगों को इंश्योरेंस पासबुक की सुविधा प्रदान करते हैं। उन्होंने डाक कर्मियों से कहा कि घर -घर जाकर लोगों को समझाइए कि बीमा क्यों जरूरी है। उन्होंने कहा कि डाक विभाग का स्वयं का ही व्यवसाय है। पोस्ट ऑफिस में अगर नित्य दिन 40-50 हजार रुपए का ट्रांजक्शन होगा तो जरूरत मंद लोग को नगद राशि तुरंत उपलब्ध कराई जा सकती है। डाक विभाग की उपलब्धि गिनाते कहा कि मनरेगा राशि का जॉब कार्डधारियों का भुगतान ठीक-ठाक हो रहा है।

डाक कर्मियों को संबोधित करते हुए उन्होंने पीएलआई व आरपीएलआई पर विशेष रूप से ध्यान देने की बात कही। व्यवसाय में लाभ देंगे तो वेतन के साथ इंटेसिव भी जोड़ को मिलेगा। जन-जन तक बीमा सेवा का लाभ पहुंचाएं आपको भी इसका दूरगामी लाभ मिलेगा। बीपीएल परिवारों, जॉब कार्डधारियों को भी भविष्य में बीमा लाभ के लिए उत्प्रेरित करें। ऐसा करने से शाखा डाक घरों में भी आमदनी का स्रोत बढ़ेगा। असुविधा के बारे में बताएं तो मदद किया जाएगा। डाक विभाग जीवन बीमा के मामला में पीछे चल रहा है।