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जामताड़ा में विशेषज्ञ दल का गठन होगा

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - जामताड़ा
जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए जंगल का अस्तित्व भी बचाना जरूरी है। जंगल उजड़ेंगे तो स्वाभाविक सी बात है कि वन्य प्राणी हाथी व अन्य गांव व शहर की ओर पलायन करेंगे ही। पर्यावरण संतुलन को बरकरार रखने के लिए मनुष्य की सहभागिता भी जरूरी है। हाल के वर्षों में जामताड़ा वन प्रमंडल क्षेत्र में जंगली हाथियों के झुंड का आवक बढ़ा है। पुरातन सोच व जागरूकता की कमी के कारण या हाथियों को छेडऩे की वजह से जामताड़ा, कुंडहित, फतेहपुर, करमाटांड़, नाला, नारायणपुर में समय-समय पर उनके माध्यम से जान-माल की भी क्षति पहुंचाई जाती रही है। बार-बार हाथियों की आवाजाही सुनिश्चित होने की वजह से पूरे जिला के लोगों में दहशत का माहौल भी व्याप्त है। उपर्युक्त समस्याओं के निदान को लेकर आमलोगों की प्रतिक्रिया व अन्य विभागों की सहभागिता के मद्देनजर गुरुवार को वन व पर्यावरण विभाग जामताड़ा वन प्रमंडल की ओर से रेडक्रॉस भवन के सभाकक्ष में जागरूकता कार्यशाला सह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय था हाथी आवाजाही की समस्या। कार्यक्रम का उद्घाटन संथालपरगना मुख्य वन संरक्षक शशिनंदन कुलियार, डीएफओ राजीव कुमार राय, एसी डॉ. रवींद्र कुमार सिंह व अन्य गणमान्य अतिथियों के संयुक्त दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। कार्यक्रम में कार्यकारी जिला परिषद अध्यक्ष आनंद लाल मरांडी, सदर प्रमुख नीलमुनी मरांडी, रेंज ऑफिसर सुखनंदन कुमार, जीतेंद्र कुमार हजरत, नारायणपुर सीओ विभूति मंडल, सदर प्रखंड सीओ हेमा प्रसाद, पुलिस इंस्पेक्टर, सभी थाना प्रभारी, सचिव राजेंद्र शर्मा, नेहरू युवा केंद्र के समन्वयक रामदेव प्रसाद, रफीक अंसारी, स्थानीय जनप्रतिनिधियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं व वन प्रमंडल कर्मियों की भी उपस्थिति हुई। कार्यक्रम की शुरुआत में डीएफओ राजीव कुमार राय ने जंगली हाथियों से सुरक्षा व सुझाव के बारे में उपस्थित लोगों को विस्तार पूर्वक बताया। उन्होंने कहा कि हाथियों से किसी प्रकार के जान-माल की क्षति होने पर सरकारी प्रावधान के अनुसार वन प्रमंडल की ओर से जारी किए गए विहित प्रपत्र में आवेदन भर कर संबंधित क्षेत्र के सीओ व थाना प्रभारी की संयुक्त अनुशंसा से तुरंत रेंज ऑफिसर को जमा कर दें। इतनी प्रक्रिया पूरी होते ही उन्हें मुआवजे की राशि मिल जाएगी। कार्यक्रम में जिप के कार्यकारी अध्यक्ष, प्रमुख व समाजसेवी हरिपदो पाल ने भी विचार रखे।




एसी डॉ. रवींद्र कुमार सिंह ने कहा कि हाथी से पीडि़त व्यक्ति को तेजी से मुआवजा प्रदान करना है। सेवा ऐसी हो जिसमें पारदर्शिता, जिम्मेवारी व मित्रवत की भावना निहित हो। हाथियों के आतंक से आमजनों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें क्षतिपूर्ति की भरपाई करने के लिए हम सबों को आगे आकर सहयोग करने की जरूरत है। कार्यशाला में वन, राजस्व व पुलिस पदाधिकारी के समन्वय से समस्या का हल निकालने के लिए हम सब उपस्थित हुए हैं। विहित प्रपत्र, प्रमाण पत्र आदि पर चर्चा की गई। कम से कम समय में भुक्तभोगी परिवार को मदद कैसे मिले इस पर अमल करने की जरूरत है। हाथी की चतुराई व शातिरपन से रेंज ऑफिसर भी परेशान हैं। इस बाबत विशेषज्ञ ही बता सकते हैं। अस्तित्व की रक्षा के लिए वैदिक काल से जानवर व मनुष्य संघर्ष करते आ रहे हैं। या यूं कह सकते हैं कि अधिकार व कर्तव्य के बीच जूझ रहे हैं। सेमिनार का उद्देश्य वन टू वन होना चाहिए। समाधान के बाबत बात करें। 1976 तक वन विभाग राज्य सरकार के अधीन था लेकिन अब भारत सरकार के क्षेत्राधिकार में आ गया है। 1980 में वन संरक्षण कानून अस्तित्व में आया। कार्यशाला से बात उभरी कि जामताड़ा जिला हाथियों से प्रभावित है। ग्राम सभा के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का काम करें।

सेवा में पारदर्शिता, जिम्मेवारी व मित्रता की हो भावना

आरसीएफ संथालपरगना शशिनंदन कुलियार ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते कहा कि हाथी इंसान के दुश्मन नहीं हैं। श्रवण शक्ति व याददाश्त भी हाथी का अच्छा होता है। उन्हें यह गुण पूर्वजों से विरासत में मिला है। हाथी के स्वभाव में बदलाव मनुष्य के व्यवहार पर निर्भर करता है। पूर्व में जंगल की सघनता अच्छी होने के कारण उन्हें भोजन पर्याप्त मिल जाता था। लेकिन फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं रही है जिस कारण हाथी झुंड के साथ पलायन करने को विवश हैं। कहा कि जामताड़ा वन प्रमंडल भी विशेषज्ञ दल को गठित करने के लिए प्रयासरत है। उन्हें गज निरोधक वाहन दस्ता के साथ अन्य सुविधाओं से लैस किया जाएगा। कहा कि पूर्व में मातहत रेंज ऑफिसर के दिए वक्तव्य में यह बात निखर कर आई कि मशाल से हाथी प्रभावित नहीं हो रहे हैं। मनुष्य के व्यवहार का भी वे पूर्व से ही आभास कर आक्रामक रूख अख्तियार करने लगते हैं। आरसीएफ कुलियार ने सुझाव देते कहा कि रोशनी पर्याप्त हो तो अभी भी हाथी उससे दूर भागता है। नगाड़ा बजाने से हाथी भागेगा। उन्होंने गांव स्तर पर सोलर लाइट लगाए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि लॉग टर्म उपाय है कि जंगल क्षेत्र में ऐसे पेड़ को प्राथमिकता के साथ लगाया जाए जिसे वे आहार के रूप में प्रयोग करें। हाथियों के लिए चारदीवारी नहीं बनाया जा सकता। परिस्थिति विकसित करने की जरूरत है। आमलोगों में संवेदनशीलता की भावना बढ़ाने की जरूरत है। मुआवजा आदि में राजस्व कर्मचारी बेहतर भूमिका अदा कर सकते हैं। जामताड़ा वन प्रमंडल के पास पर्याप्त राशि उपलब्ध है। हाथी के क्षतिपूर्ति रिपोर्ट मिलते ही पीडि़त परिवार को मुआवजा का भुगतान कर दिया जाएगा। मानव संसाधन की कमी हो गई है इसलिए आपसबों को सहयोग करने की जरूरत है। हाथी को तंग नहीं कर उसे सुरक्षित रहने देंगे तो वे नुकसान भी कम करेंगे। हाथी का सम्मान करेंगे तो वह भी आपका सम्मान करेगा।



हाथी इंसान का दुश्मन नहीं : आरसीएफ



: हाथियों को भगाने के लिए गज निरोधक वाहन दस्ता से लैस होगा विशेषज्ञ दल

: विगत कुछ दिनों में हाथियों के उत्पात से लोगों को नुकसान और गांव में दहशत का माहौल

: जंगलों में लगातार कमी आने से हाथी बाहर घूमने या एक जगह से दूसरी जगह पलायन करने को विवश



हाथी से बचाव के उपाय - हाथी के प्रति लोगों में जागरूकता लाने को रेडक्रॉस में आयोजित की कार्यशाला