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‘तख्तश्री के संविधान में जत्थेदार का पद सर्वोपरि’

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - पटना
तख्तश्री हरिमंदिर जी पटना साहिब के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह ने गुरुवार को दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान तख्तश्री कमेटी के साथ कोई समझौता नहीं मानने की बात फिर दोहराई। कहा कि तख्तश्री के संविधान के अनुसार जत्थेदार का पद सर्वोपरि होता है। लेकिन यहां लोग इस पद की गरिमा नहीं समझ रहे हैं।
सिंह ने बुधवार को जिलाधिकारी एन सरवणन से भी मुलाकात की थी। जत्थेदार ने बताया कि एडीजीपी के व्यक्तिगत बुलावे पर गए थे। वहां एसएसपी मनु महाराज भी मौजूद थे। दोनों पदाधिकारियों के सामने विशेष दीवान में घटी सात जनवरी की घटना बयान की। कहा कि सिख पंथ के इतिहास में जत्थेदार पर हमले की की यह पहली घटना थी। उन्होंने कहा कि पंच प्यारों की अनुमति लिए बिना तख्तश्री कमेटी की ओर से ज्ञानी प्रताप सिंह को मुख्य गं्रथी बनाया गया। कमेटी जब तक उनकी सदस्यता रद्द नहीं करती, तब तक कोई समझौता नहीं हो सकता। कमेटी के नामजद पदाधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। बताया कि जिलाधिकारी एवं एसएसपी ने उन्हें इंसाफ दिलाने का आश्वासन दिया है।
उनसे पहले यहां जत्थेदार व हेड ग्रंथी भाई मान सिंह थे। 14 अगस्त, 2000 को उनका निधन हुआ। इसके बाद उन्हें जत्थेदार बनाया गया। देश में पांच प्रमुख तख्तश्री साहिब हैं। एसजीपीसी में तीन जत्थेदार हैं। इसमें श्री अकाल तख्त, श्री केशगढ़ साहिब व श्री दमदमा साहिब हैं। इनके अलावा तख्तश्री पटना साहिब व तख्तश्री हजूर साहिब में भी जत्थेदार हैं। यहां हमने सुरक्षा की मांग नहीं की। हेड ग्रंथी रहे भाई मान सिंह को सुरक्षा के लिए 25 जवान मिले थे।



जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह ने तख्तश्री कमेटी के साथ कोई समझौता नहीं करने की बात फिर दोहराई