३ माह में 440 करोड़ खर्च करने की चुनौती
भास्कर न्यूज - पटना
गांव की सड़कों के निर्माण की गति बहुत धीमी है। ऐसे में इन सड़कों को बनाने वाले ग्रामीण कार्य विभाग को तीन माह में 440 करोड़ रुपए खर्च करने की चुनौती है। यह हाल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना का है। इस योजना के अंतर्गत राज्य के किसी भी कोने से अधिकतम छह घंटे में पटना पहुंचने के सपने को साकार करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में बारहमासी पक्की सड़कों का सुगम जाल बिछाना है। इसके लिए 250 या उससे अधिक आबादी वाले सभी अनजुड़ें टोलों को चरणबद्ध रूप से संपर्कता प्रदान करनी है। पांच वर्षों में ऐसे 32 हजार 200 टोलों के लिए 37 हजार 908 किलोमीटर लंबाई वाले 22 हजार 363 पथों का निर्माण करना है।
इंजीनियरों की कमी और प्राथमिकता के निर्धारण में देरी है मुख्य कारण
नौ माह में खर्च हुए 1244 करोड़
अप्रैल से दिसंबर के बीच राज्य योजना से गांव की सड़कों के निर्माण पर 1244 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। चालू वित्तीय वर्ष ((2013-14)) में इस योजना के तहत 1684 करोड़ रुपए खर्च कर 3180 किलोमीटर सड़क और 2391 मीटर पुल बनाने का लक्ष्य है। इसमें दिसंबर, 13 तक 1244 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं, जिनसे 1468 किलोमीटर सड़क और 102 मीटर पुल बना है।
कम राशि खर्च होने का मुख्य कारण विभाग में इंजीनियरों की कमी है। खासकर निचले स्तर पर काम करने वाले जूनियर इंजीनियरों के 50 फीसदी पद रिक्त हैं। इसके चलते टेंडर प्रक्रिया में ही काफी समय लग गया। सड़कों की प्राथमिकता के निर्धारण में भी देरी हुई। इन प्रक्रियाओं को पूरा करते-करते बारिश का मौसम शुरू हो गया। अक्टूबर से सड़क निर्माण शुरू हुआ। वैसे मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत 1169 करोड़ की लागत से 1505 किलोमीटर लंबाई वाले 970 पथों का औपचारिक शिलान्यास पांच दिन पहले 23 जनवरी को ही मुख्यमंत्री ने किया है। पर इसी योजना में शामिल कर दी गई पहले से चल रहीं अन्य योजनाओं पर अप्रैल से ही काम चल रहा है।
इंजीनियरों के पद रिक्त होने से मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के क्रियान्वयन में आ रहीं दिक्कतें