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बंपर पैदावार के आसार, रखने के इंतजाम नहीं

8 वर्ष पहले
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विशेष संवाददाता-!-भोपाल
मध्य प्रदेश में इस बार गेहूं और चना की बंपर पैदावार होने की संभावना है। किसानों के लिए यह खुशखबरी हो सकती है, लेकिन इसने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। क्योंकि इतना अनाज रखने के लिए गोदाम नहीं हैं। दरअसल रबी के सीजन में 1.90 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं और 47 लाख मीट्रिक टन चने का उत्पादन होने की संभावना है, जबकि राज्य शासन के पास वर्तमान में 1.15 करोड़ मीट्रिक टन अनाज रखने की व्यवस्था है। कृषि विभाग ने भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। जिसमें कहा है कि नए गोदाम बनाने के साथ ही समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदने धन राशि और बारदानों की समय रहते व्यवस्था करने की जरूरत है।
कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार विगत वर्ष की तुलना में इस बार 30 लाख मीट्रिक टन गेहूं अधिक पैदा होने का अनुमान है। शरबती और व ड्यूरम गेहूं को अलग कर दिया जाए तब भी समर्थन मूल्य ((1550 रुपए प्रति क्विंटल)) पर 1 करोड़ 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन की संभावना है। यदि इस माह में पाले के कारण चने की सफल को नुकसान नहीं होता है और बाजार भाव की स्थिति समर्थन मूल्य से कम रहती है तो कुल उत्पादन 47 लाख में से लगभग 30 लाख मीट्रिक टन उपार्जन हो सकता है। इस हिसाब से 1 करोड़ 45 लाख मीट्रिक टन अनाज रखने के लिए गोदामों की जरूरत होगी। वर्तमान में 46 लाख मीट्रिक टन क्षमता के सरकारी और 69 लाख मीट्रिक टन क्षमता के प्राइवेट गोदाम हैं।



टन अनाज रखने के लिए गोदामों की जरूरत होगी। वर्तमान में 46 लाख मीट्रिक टन क्षमता के सरकारी और 69 लाख मीट्रिक टन क्षमता के प्राइवेट गोदाम हैं।

ञ्चइस रबी सीजन में गेहूं-चने का संयुक्त उत्पादन हो सकता है २.३७ करोड़ मीट्रिक टन, लेकिन राज्य शासन के पास 1.15 करोड़ मीट्रिक टन ही अनाज रखने की व्यवस्था

॥इस सीजन में अनाज रखने की किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है। इस वर्ष गोदामों की क्षमता 1 करोड़ 52 लाख मीट्रिक टन करने का लक्ष्य है। दस जिलों में 50-50 हजार मीट्रिक टन क्षमता के अत्याधुनिक स्टील साइलोज स्थापित किए जा रहे हैं।ञ्जञ्ज

- शिवशेखर शुक्ला, एमडी, वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन

॥पिछले साल की तुलना में रबी के सीजन में गेहूं व चना का रकबा बढ़ा है। इस हिसाब से दोनों फसलों को मिलाकर 1 करोड़ 45 लाख मीट्रिक टन उपार्जन होने का अनुमान है। ऐसे में गोदामों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। इसको लेकर कृषि विकास आयुक्त के माध्यम से मुख्य सचिव को पत्र भेजा गया है।ञ्जञ्ज

- डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव, कृषि

वर्ष गेहूं चना

2011-12 76.30 33.90

2012-13 105.80 41.60

2013-14 161.00 43.00

2014-15 190.00 47.05

((अनुमान))

((आंकड़े : लाख मीट्रिक टन में))

रबी के मौसम में गेहूं की फसल का रकबा 57 लाख हेक्टेयर और चने का रकबा 35.25 लाख हेक्टेयर है।

विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर 18 घंटे बिजली की उपलब्धता और अच्छी बारिश के चलते मप्र इस रबी के मौसम के दौरान गेहूं की पैदावार में एक और रिकॉर्ड बना सकता है। आरंभिक आंकलन के अनुसार यदि सब कुछ ठीक रहा तो मप्र गेहूं के मामले में पंजाब से आगे निकल जाएगा। यानी उत्तरप्रदेश के बाद मप्र दूसरे स्थान पर आ जाएगा। पिछले वर्ष प्रदेश ने हरियाणा को पीछे छोड़ दिया था।

मप्र में पांच साल की

उत्पादन की स्थिति

गेहूं-चने का रकबा बढ़ा है

हम तैयार हैं

पंजाब को पीछे छोडऩे

की तैयारी