- Hindi News
- आत्महत्या का विचार छोड़ें और डायल करें 1800 233 1250
आत्महत्या का विचार छोड़ें और डायल करें 1800-233-1250
नगर संवाददाता - भोपाल
‘जीवन अनमोल है यदि आपको लगता है कि जीवन में सब कुछ खत्म हो गया है, कहीं कोई आशा की किरण नजर नहीं आ रही है। मन में आत्महत्या करने का विचार बार-बार आ रहा है तो एक बार हेल्प लाइन नंबर 1800-233-1250 पर फोन जरूर करें। नई राहें बताने के लिए हम लोग है ना’ यह स्लोगन है जेपी अस्पताल में चल रहे जीवन आधार हेल्प लाइन और परामर्श केंद्र का। बीती 14 जनवरी से शुरू की गई इस हेल्प लाइन ने पांच लोगों को खुदकुशी करने से रोका है। एक मामले में काउंसलिंग चल रही है।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन भोपाल द्वारा संचालित जीवन आधार हेल्प लाइन बच्चों की काउंसलिंग करने के साथ-साथ अब जीवन बचाने का काम भी कर रही है। इसकी प्रभारी प्रीति माथुर ने बताया कि जारी माह में आत्महत्या करने का विचार करने वाले 2 व्यक्तियों और 3 बच्चों की काउंसलिंग की गई। अब वे अवसाद से बाहर है। सभी पांच मामलों में फालोअप किया जा रहा है।
जीवन आधार हेल्प लाइन में किशोर-किशोरियों की नि:शुल्क काउंसलिंग की जाती है। जेपी अस्पताल के दूसरे फ्लोर पर काउंसलिंग सेंटर पर जाकर सुबह 9 से शाम 5 बजे तक परामर्श लिया जा सकता है। इसके अलावा टोल फ्री नंबर 1800-233-1250 में सुबह 8 से रात 8 बजे तक फोन किया जा सकता है। काउंसलिंग की सभी बातें गोपनीय रखी जाती है।
यहां करें संपर्क
बच्चों में नहीं रही सहनशीलता
॥न्यूक्लियर फैमिली का कांसेप्ट प्रचलन में है। अभिभावक के कामकाजी होने से वह बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम नहीं बिता पाते है। उन्हें जितना भी समय बच्चों के साथ बिताने को मिलता है तो उनकी कोशिश होती है कि बच्चों की हर इच्छा पूरी कर दे। जैसे ही बच्चे बड़े होते हैं तो उन पर अंकुश लगना शुरू हो जाता है। जिससे अभिभावकों के साथ टकराव की स्थिति बनती है। चूंकि बच्चे सहनशील नहीं होते, उन्हें न सुनने की आदत नहीं होती, इसलिए वे आत्मघाती कदम उठाते है या सोच लेते हैं। अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों के साथ संवाद बनाए रखे। बच्चों को अच्छे-बुरे का अंतर बचपन से ही समझाए।ञ्जञ्ज
डॉक्टर काकोली राय, मनोवैज्ञानिक
छोटी-छोटी बातें हो जाती हैं बड़ी
श्रीमती माथुर ने बताया कि एक किशोरी ने अपने हाथों की नस इसलिए काट ली कि उसके बॉयफ्रेंड ने उससे मिलने से इंकार कर दिया था। अब लड़की को हेल्पलाइन में काउंसलिंग चल रही है। लड़की के साथ उसके अभिभावकों की भी काउंसलिंग की जा रही है। ऐसे ही आत्महत्या का प्रयास करने वाले तीन बच्चों की जेपी अस्पताल में काउंसलिंग की गई। एक बच्चे ने आत्महत्या का प्रयास केवल इसलिए किया क्योंकि उसके माता-पिता ने उसे रिश्तेदार के सामने डांट दिया था। वहीं एक बच्चा यूनिट टेस्ट में फेल हो गया था। तीसरे बच्चे के अभिभावकों ने स्कूल पहुंचकर उसके बारे में पूछताछ की तो दोस्तों द्वारा मजाक बनाए जाने पर उसके मन में ऐसा घातक विचार आया।
चोरी करने से रोका था
हेल्प लाइन में 17 वर्षीय युवती की काउंसलिंग चल रही है। उसने जहर खाया लिया था। काउंसलिंग में पता चला कि युवती ने अपने घर के रुपए बॉयफ्रेंड को दे दिए थे। इस पर अभिभावकों ने उसे पूछा कि कहीं कोई गलती तो नहीं हुई है, जिसके लिए उसे बॉयफ्रेंड को रुपए देने पड़े। यह बात युवती को बर्दाश्त नहीं हुई और उसने आत्मघाती कदम उठाने के बारे में सोच लिया।
जेपी अस्पताल में किशोर हेल्पलाइन ने आत्महत्या करने से पांच लोगों को रोका