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डाउनलोड करेंभोपाल. भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर ((बीएमएचआरसी)) सहित अन्य गैस राहत अस्पतालों की निगरानी के लिए गठित सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी की बुधवार को बैठक हुई। इसमें अस्पतालों की बदहाली सामने आ गई। कमेटी ने पाया कि इलाज के साथ यहां उपकरणों एवं स्टाफ के हिसाब से इंतजाम बेहद खराब हैं। बैठक में बीएमएचआरसी के डायरेक्टर डॉ. मनोज पांडे के नहीं आने और संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. एसएस कुशवाह के देर से पहुंचने पर कमेटी ने नाराजगी जताई और कहा कि कोई इस कमेटी को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
श्यामला हिल्स स्थित प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण समिति के दफ्तर में हुई बैठक में मॉनिटरिंग कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस वीके अग्रवाल को बताया गया कि बीएमएचआरसी में कैथ-लैब पुरानी हो चुकी है। यहां तय सीमा से ज्यादा लोगों की एंजियोग्राफी हो चुकी है। डायलिसिस मशीनें भी बेहद पुरानी है। अस्पताल में नेफ्रोलॉजिस्ट भी नहीं हैं। खुद अग्रवाल ने कहा कि गैस राहत के अस्पताल कई समस्याओं से घिरे हैं।
पीआरओ को क्यों भेजा?
बैठक में बीएमएचआरसी के डायरेक्टर डॉ. मनोज पांडे ने अपनी जगह जनसंपर्क अधिकारी मजहरउल्ला खान को भेजा। कमेटी ने इस पर नाराजगी जताई तो प्रभारी निदेशक डॉ. एचके पांडे को भेजा गया, पर वे भी कमेटी सदस्यों के सवालों के जवाब नहीं दे पाए।
रिपोर्ट लिए बगैर पहुंचे डीएमई
कमेटी के संयोजक व संचालक चिकित्सा शिक्षा (डीएमई) डॉ. एसएस कुशवाह बैठक में 50 मिनट की देरी से पहुंचे। वे अस्पतालों की रिपोर्ट लिए बगैर ही वहां पहुंच गए थे। इस पर भी कमेटी ने नाराजगी जताई।
हालत यह रही कि छह गैस राहत अस्पतालों के अधीक्षक भी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं, मशीनों एवं दवा वितरण की स्थिति, उपलब्ध संसाधन समेत ओपीडी, प्रस्तावित योजनाओं आदि के संबंध में बगैर जानकारी लिए बैठक में पहुंच गए। इसको लेकर कमेटी के सदस्य पूर्णेंद्र शुक्ल ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि कोई भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मॉनिटरिंग कमेटी को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
बीएमएचआरसी से क्यों अलग हो रहे हैं डॉक्टर
कमेटी ने बीएमएचआरसी से सीनियर डॉक्टर्स के अलग होने पर चिंता जताई। साथ ही इस पर चर्चा की कि क्या वहां प्राइवेट पेशेंट के इलाज में डॉक्टरों को मिलने वाला रेवेन्यू शेयरिंग सिस्टम फिर शुरू कर उन्हें रोका जा सकता है? बैठक में तय हुआ कि फरवरी के पहले सप्ताह में कमेटी बीएमएचआरसी के मौजूदा और हाल ही में इस्तीफा देने वाले डॉक्टरों से उनकी समस्याएं सुनेगी। बाद में इसकी जानकारी संस्था के डायरेक्टर को दी जाएगी।
27 से कमेटी का नया दफ्तर
कमेटी अब 27 जनवरी से डीआईजी बंगले स्थित स्थित नए दफ्तर में अपना काम शुरू कर देगी। इसके बाद कमेटी, गैस राहत अस्पतालों का दौरा करेगी।
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