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मंच पर दिखा भोज का व्यक्तित्व

8 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर भोपाल
राजा का जीवन दोधारी तलवार होता है। वे संसार में रहते हुए भी एक योगी सा जीवन बिताते हैं। इसलिए पहले के राजा हमेशा गुरु के चरणों में रहते थे। राजपाट के साथ स्वयं के भीतर भी झांकने का उनके पास साहस और समय होता था, लेकिन आज के शासकों के पास न तो समय है और न ही साहस। आज के दौर में राजा भोज जैसी सोच रखने वाले शासकों की आवश्यकता है। राजा भोज के व्यक्तित्व में न्यायप्रियता, धर्म प्रियता, साहित्य प्रेम, प्रजा के प्रति उनकी चिंता और दूरदृष्टि साफ झलकती है।
राजा भोज के ऐसे ही गुणों पर प्रकाश डाला गया दिखा बुधवार को हम थिएटर ग्रुप की प्रस्तुति ‘जयति जय जय भोजराज’ में। भारत भवन के अंतरंग सभागार में दिनेश देवराज लिखित और बालेंद्र सिंह निर्देशित इस नाटक में धर्मेंद्र-श्रुति के संगीत ने नाटक को रोचकता प्रदान की।
नाटक में सहायक निर्देशन अशमी सिंह, लेखन दिनेश देवराज, गीत विवेक मृदुल और प्रकाश परिकल्पना विश्वजीत पाटनकर की रही। प्रस्तुति में कलाकार अंकित शिरबाविकर ने राजा भोज का प्रभावी किरदार निभाया। अन्य कलाकारों ने भी कैरेक्टर्स के साथ न्याय किया।




लिखे थे कई ग्रंथ

डायरेक्टर्स कट : एक महान अभिनेता भी थे राजा भोज

प्रजा पालक राजा भोज ने अपने जीवन काल में जनता की प्रगति के लिए कई ग्रंथों की रचना की थी। इनमें ‘सरस्वतीकंठाभरण’, ‘शृंगारमंजरी’, ‘चंपूरामायण’, ‘चारुचार्य’, ‘तत्वप्रकाश’, ‘व्यवहारसमुच्चय’ आदि

ग्रंथ उल्लेखनीय हैं।

 यह प्रस्तुति परमार वंश के ९वें शासक राजा भोज पर आधारित है। उन्होंने कई युद्धों में वीरता का परिचय दिया, लेकिन वे खुद युद्ध को लोगों के विकास में बाधक मानते थे। उनका कहना था कि युद्ध तो कभी भी किए जा सकते हैं, लेकिन विकास कार्य हर समय नहीं हो सकता। इस नाटक में राजा भोज के गुण, दान, शीलता, वीरता, विद्वता और प्रभुत्व को मुख्य रूप से दिखाया गया है। राजा भोज भेष बदलने की कला में प्रवीण थे, इसलिए उन्हें उस समय का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता भी कहा गया है। उनके अंदर व्यक्तियों को परखने की अद्भुत क्षमता थी, वो ज्योतिष शास्त्र और संस्कृत के प्रकांड पंडित थे। उन्होंने शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए प्रत्येक गांव में पाठशाला का निर्माण कराया, मालवा की भूमि को उपजाऊ और हरा-भरा बनाने के लिए नहरों और तालाबों का निर्माण कराया। कवियों, साहित्यकारों को हमेशा उनका संरक्षण मिला। नाटक के लिए उन्होंने भोजशाला का निर्माण कराया। वह स्वयं वीणा वादन में प्रवीण थे। इन सभी बातों का समावेश नाटक में किया गया है। - बालेंद्र सिंह, नाटक के डायरेक्टर



भारत भवन में बुधवार को नाटक ‘जयति जय जय...’ में किरदारों ने मंच पर दिखाया कि राजा भोज बल-बुद्धि-विवेक

के कितने धनी थे।

स्रह्म्ड्डद्वड्ड शठ्ठ द्मद्बठ्ठद्द

 अंतरंग सभागार में बुधवार को प्रस्तुत नाटक ‘जयति जय जय भोजराज’ में राजा भोज और जनता के प्रतिनिधि के बीच संवाद का एक दृश्य।