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बिना कुछ बोले कह दी रामायण

8 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर भोपाल
रंगश्री लिटिल बैले ट्रुप के 61 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘रंग महोत्सव’ का गुरुवार को समापन ‘रामायण बैले’ की प्रस्तुति से हुआ। 61 साल से लगातार देश विदेश में रंगश्री संस्था की ओर से लगभग 500 प्रस्तुतियां दी जा चुकी हैं। 1953 में सुप्रसिद्ध कोरियोग्राफर शांति बर्धन ने मुंबई में रामायण बैले की पहली प्रस्तुति दी थी।
बैले में दिखाया ‘अखंड भारत’
देश की विविध संस्कृति को अपने में समाहित किए ‘रामायण बैले’ में अखंड भारत के दर्शन हुए। गोस्वामी तुलसीदास की रामचरित मानस, ओडिसी रामायण कृतिवास, दक्षिण भारत की कम्ब रामायण, टीवी सीरियल हनुमन, संस्कृत कृति प्रसन्न राघव और दशकुमार के कई प्रसंगों को मिलाकर इस बैले की रचना की गई। वहीं रचना के प्रसंगों को सूत्रधार ने गुजराती शैली में प्रस्तुत किया। बैले ऑफ सेंचुरी अवॉर्ड प्राप्त रंगश्री संस्था के बैले को खास बनाते हैं कॉस्ट्यूम और सेट्स। टाट से बने कॉस्ट्यूम और सेट्स छ: दशक पूर्व कलाकारों ने ही तैयार किए थे। पिछले 61 साल से हर प्रस्तुति में इन्हीं का उपयोग किया जा रहा है। वहीं, रामायण के नौका विहार और हनुमान के समुद्र पार करने के प्रसंग में स्पेशल इफेक्ट दिया गया है।




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रंगश्री लिटिल बैले ट्रुप के 61 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘रंग महोत्सव’ का समापन गुरुवार को ‘रामायण बैले’

की शानदार प्रस्तुति से हुआ।

मंच पर और मंच से परे

रामायण बैले की पहली प्रस्तुति से लेकर देश-विदेश में इसे लोकप्रिय बनाने में स्व. शांति बर्धन, स्व. प्रभात गांगुली और स्व. गुलबर्धन का अहम योगदान रहा है। मंच पर प्रताप मोहन्ता, उपेंद्र मोहन्ता, दीप्ति मोहन्ता, शैलेंद्र सिंह, सप्तरथी मोहन्ता, दयानिधि मोहन्ता, श्रुतिकीर्ति बारिक, पद्मा सोनकर, मोनिका पाण्डेय, मोन्टी सालवे, लक्ष्मण सामंत और सौहलत यार खान ने सहयोग किया। रामायण बैले में बहादुर हुसैन खां और अवनि दासगुप्ता ने संगीत दिया। लाइटिंग व्यवस्था तरुण दत्त पांडेय ने संभाली।

 रामायण बैले में विवाह के बाद ओयध्या आने पर राम-सीता, दशरथ और कौशल्या से आशीर्वाद लेते हुए।

क्क॥ह्रञ्जह्र : स्॥्र्रहृ क्च्र॥्रष्ठक्र