लोक धुनों में गूंजेगा वंदे मातरम्
सिटी रिपोर्टर भोपाल
राष्ट्रीय-गीत ‘वंदे मातरम्’...को शास्त्रीय संगीत और लोकधुनों के ताने-बाने के साथ तैयार किया जा रहा है। राष्ट्रीयता से ओतप्रोत इस गीत की धुन जहां शास्त्रीय वाद्ययंत्रों पर बजेगी, वहीं देश के तमाम लोक वाद्य यंत्र इसी गीत में अपनी लोकधुनों का समावेश भी करेंगे। यह अपनी तरह का अनूठा प्रयोग होगा। लोकरंग के मंच पर 27 जनवरी को ‘कलिन्दर’ नाम से तार और तालवाद्य पर मध्यप्रदेश की लोकधुनों और देशभक्ति से ओतप्रोत गीतों की प्रस्तुति की जाएगी। इसकी रिहर्सल इन दिनों जनजातीय संग्रहालय के सभागार में चल रही है। कश्मीर, बंगाल, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के तंत्र वाद्यों से रची-बसी प्रस्तुति का संगीत निर्देशन अनिल मिश्रा कर रहे हैं। कई दुर्लभ वाद्ययंत्रों को लोक कलाकार परफार्म कर रहे हैं जो कई पीढिय़ों से उनकी परंपरा और संस्कारों का सूचक बन गया है।
राष्ट्रीयता के एक सुर में बंधेंगे सामूहिक वाद्ययंत्र
रवींद्र भवन के विशाल मुक्ताकाश मंच पर एक साथ लगभग 80 कलाकार, लगभग 20 तार वाद्ययंत्रों की सामूहिक प्रस्तुतियां देंगे। इसमें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकार भी हैं। खास बात यह है कि विभिन्न लोक परंपरा, संस्कृति के सूचक देश के विभिन्न वाद्य यंत्र एक सुर राष्ट्रीयता की भावना लिए होंगे।
 जनजातीय संग्रहालय में चल रही रिहर्सल का एक दृश्य।
ये रहेगा खास
इस खास प्रस्तुति में लगभग 80 कलाकारों के साथ लोक संगीत और शास्त्रीय संगीत को एक साथ मिलाकर प्रयोग किया गया है। इसमें वंदे मातरम्, मैहर गीत मात शारदा..., बघेली कुआं पूजन जल भरा..., मालवा का चटके चुमड़ली हो चंदा...मध्यप्रदेश गान और राष्ट्रीय धुनों से सराबोर प्रस्तुति होगी। वंदे मातरम् में शास्त्रीय वादक वंदे मातरम् परफार्म करेंगे और लोक वाद्य यंत्र वादक उस दौरान अपनी लोकधुनों को परफार्म करेंगे।
गूंजेंगे ये वाद्ययंत्र
कश्मीर : रबाब, सारन
((सारंगी का एक :प))
राजस्थान : कमायचा, रावणहत्था, मोरचंद, सिंधी सारंगी,
मध्यप्रदेश : इकतारा, तंबूरा, रेकडिय़ा
छत्तीसगढ़ : बेंजो, चिकारा
बंगाल : गुबगुबी, दोतारा
शास्त्रीय वाद्ययंत्र : सितार, संतूर, वायलिन, सारंगी और सरोद
द्घशह्म् द्यशद्मह्म्ड्डठ्ठद्द