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संतूर-बांसुरी की अनोखी जुगलबंदी

8 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर भोपाल
बांसुरी और संतूर के सुर एक साथ कभी गति पकड़ते तो कभी धीमी लय में अठखेलियां करते। बांसुरी की मधुर तान और संतूर के तारों के बीच बुधवार को अनूठी जुगलबंदी हुई। सुरीले अहसास के साथ प्रसिद्ध संतूर वादक संदीप चटर्जी और पंडित हरि प्रसाद चौरसिया के शिष्य संतोष संत ने यह प्रस्तुति दी। बुधवार को ‘अभिनव कला परिषद’ की ओर से रवीन्द्र भवन में आयोजित ‘उत्सव गणतंत्र’ में शुरुआत राग यमन से हुई। आलाप जोड़ झाला को बगैर किसी रिदम से शुरू करते हुए शुरू में ही श्रोता संगीत की अलग दुनिया में खो गए। बाद में उन्होंने रागदारी और लयकारी के साथ सुंदर प्रस्तुतियां दीं। अगली प्रस्तुति मध्यलय रूपक ताल में हुई। कार्यक्रम के अंत में संदीप-संतोष ने अपने एल्बम ‘वैली अगेन’ की कंपोजिशन ‘राग मिश्र खमाज’ में प्रस्तुत दी।
दिल मिले इसलिए करते हैं जुगलबंदी: कार्यक्रम से पहले बांसुरी वादक संतोष संत और संतूर वादन संदीप चटर्जी ने जुगलबंदी से जुड़े अनुभव शेयर किए। संतोष ने बताया कि वे मुंबई से हैं और संदीप कोलकाता से हैं। 2011 में उनकी मुलाकात एक कंसर्ट में हुई। जुगलबंदी करते हुए उन्हें पता ही नहीं चला की वे पहली बार साथ में बजा रहे हैं। संतोष ने बताया कि हमारे दिल मिल गए, इसलिए हमने जुगलबंदी करना शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि लोग कभी-कभी हमारी प्रस्तुति में शिव-हरि की जुगलबंदी को तलाशने लगते हैं।



‘उत्सव गणतंत्र’ में पहले दिन संतूर वादक संदीप चटर्जी और बांसुरी वादक संतोष संत की अनोखी प्रस्तुति।

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