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निर्भया का काम सुरक्षा देना है न कि प्रताडि़त करना : महिला आयोग

8 वर्ष पहले
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भोपाल. राज्य महिला आयोग ने पुलिस की निर्भया पेट्रोलिंग टीम की मॉरल पुलिसिंग पर आपत्ति जताई है। आयोग ने गुरुवार को टीम की सदस्यों को फटकार लगाते हुए कहा कि निर्भया अपने उद्देश्य से भटक गई है। वह निजता का हनन कर लड़कियों के चेहरे से कपड़े हटवा रही है। उसका काम लड़कियों को सुरक्षा प्रदान करना है न कि उन्हें प्रताडि़त करना।
बुधवार को निर्भया टीम ने बोट क्लब के पास खड़ी दो छात्राओं को पकड़कर उन्हें डांटा और उनसे कान भी पकड़वाए थे। टीम ने उनके अभिभावक तथा स्कूल के प्रिंसिपल को भी बुलवा लिया था।

इस मामले में आयोग ने खुद संज्ञान लेकर टीम को तलब किया। सुनवाई के दौरान टीम की प्रभारी नमिता साहू ने दावा किया कि लड़कियों का पहनावा ठीक नहीं था। सुरक्षा के लिहाज से उनसे पूछताछ की गई थी। इस पर आयोग की अध्यक्ष उपमा राय ने कहा कि दोनों छात्राएं बहनें है। न तो दोनों वहां संदिग्ध हालत में पकड़ी गई थीं और न ही उन्होंने कोई अपराध किया था। इस मामले में निर्भया प्रभारी का कहना है कि आयोग के निर्देशों का टीम शुरू से पालन कर रही है। अब अतिरिक्त सतर्कता बरतेंगे।

राय ने डीआईजी से इस बिंदु पर जांच रिपोर्ट मांगी है कि इन तथ्यों के बावजूद टीम ने किसी धारा के तहत छात्राओं पर कार्रवाई की है? राय ने कहा कि आयोग को अब तक दस ऐसी शिकायतें मिल चुकी हैं, जिनमें इस टीम पर लड़कियों को परेशान करने का आरोप लगा है।


पूछताछ करें, दुर्व्यवहार नहीं

महिला पुलिस और उसकी टीम शहर की हर उस नकाबपोश लड़की से पूछताछ कर सकती है, जिसकी गतिविधियां संदिग्ध दिखे। पहचान करने के लिए पहचान-पत्र भी मांग सकती है, लेकिन उनसे दुव्र्यवहार नहीं कर सकती। महिला पुलिस का काम ही लड़कियों, महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करना है न कि उन्हें अपमानित करना।

जस्टिस आरडी शुक्ला, रिटायर्ड जज, हाईकोर्ट

महिलाएं और युवतियां किसी भी तरह की परेशानी होने पर फोन नंबर 1090, पुलिस कंट्रोल रूम 100, निर्भया पेट्रोलिंग टीम 94251-55777, 94799-90594, महिला हेल्प लाइन भोपाल 1091, 0755-2420026 और 2443801 पर संपर्क करें। यदि यहां सुनवाई नहीं होती तो महिला आयोग के टोल-फ्री नंबर 1800-233-6112 और 0755-2661802 पर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं।

महिलाएं यहां करें शिकायत

:फोन पर शिकायत मिले तो लड़कियों की सहायता के लिए तुरंत पहुंचे।

:छेड़छाड़ को रोकने के साथ असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई करें।

:स्कूल और कॉलेजों के आसपास खड़े संदिग्धों पर कार्रवाई करे।

:भीड़भाड़ वाले इलाकों में युवतियों और महिलाएं की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

:छेडख़ानी रोकने के लिए बसों और मिनी बसों की चैकिंग करें।