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जमीन की कीमत के हिसाब से तय होगा पार्किंग शुल्क

8 वर्ष पहले
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भोपाल. राजधानी समेत प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों में जमीन की कीमत के हिसाब से पार्किंग शुल्क तय किया जाएगा। यानी, पार्किंग एरिया की जमीन की कीमत जितनी ज्यादा होगी, पार्किंग शुल्क उतना ही महंगा होगा। यही नहीं, वाहन खरीदते वक्त आपको अपने घर में उसके लिए पार्किंग स्पेस भी बताना होगा। शहरों में बढ़ती पार्किंग की दिक्कत से निपटने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा तैयार किए गए पार्किंग नीति के मसौदे में ये प्रावधान किए गए हैं।

अब इस मसौदे को फरवरी में होने वाली कैबिनेट बैठक में भेजा जा रहा है। वहां से मंजूरी के बाद यह तय किया जाएगा कि शहर के किस इलाके में कितना पार्किंग शुल्क होगा। मसौदे में निजी भागीदारी से मल्टीलेवल पार्किंग के निर्माण के भी प्रावधान हैं।

राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति के तहत हर राज्य को शहरी पार्किंग नीति का निर्माण करना है। इसके तहत मप्र ने दो साल पहले नीति बनाने की शुरूआत की थी, लेकिन मसौदा अब तैयार हुआ है। इसमें राष्ट्रीय नीति के प्रावधानों के अनुसार डिफरेंशियल पार्किंग शुल्क तय करना प्रस्तावित किया है। साथ ही बाजार या कमर्शियल इलाके में व्यस्त समय में गाडिय़ों की पार्किंग के लिए ज्यादा शुल्क लिया जाएगा। केबिनेट में जमीन की कीमत की गणना सरकारी दाम ((कलेक्टर गाइडलाइन)) के आधार पर निर्धारित होगी।

नीति में इस बात पर जोर दिया गया है कि लोगों को पार्क एंड राइड की सुविधा मिल सके। यानी कि घर से बाजार या कार्यस्थल तक जाने पर बस स्टॉप या मेट्रो स्टेशन के पास ही वाहन पार्क हो सके। वर्तमान पार्किंग दर-अभी नगर निगम पार्किंग की दरें तय करता है। इसमें प्रति चार घंटे में टू व्हीलर के लिए 2 रु. और फोर व्हीलर के लिए 5 रु. पार्किंग शुल्क है। पांच सालों से इसमें बढ़ोतरी नहीं हुई है।

ये होगा फायदा
: कमर्शियल इलाकों में वाहनों का दबाव ज्यादा। यहां पार्किंग शुल्क अधिक होने पर लोग कुछ दूरी पर बने दूसरे पार्किंग स्थल जाएंगे।

: पार्किंग महंगी होने पर लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरफ शिफ्ट होंगे, जिससे सड़कों पर निजी गाडिय़ां की संख्या नियंत्रित होगी।

फॉर्मूले से तय होंगी दरें
कैबिनेट से मंजूरी के बाद शहरी पार्किंग नियम और बायलाज बनाए जाएंगे। इसमें हर इलाके की जमीन की कीमत के हिसाब से एक फॉर्मूला तय कर पार्किंग शुल्क निकाला जाएगा।

पार्किंग नीति के मसौदे के बिंदु

:मल्टी स्टोरी बिल्डिंग्स के निर्माण के वक्त ही पार्किंग के लिए निर्धारित स्थान छोडऩे की शर्त।

:बिल्डिंग परमिशन के लेआउट में निजी पार्किंग के लिए स्थान सुनिश्चित किया जाना।

:लैंडयूज के हिसाब से पार्किंग का विस्तृत प्लान तैयार किया जाना।

: शहर में सड़कों के किनारे होने वाली पार्किंग पर प्रतिबंध लगाया जाना।

:मल्टीलेवल पार्किंग के निर्माण में कमर्शियल उपयोग को मान्य किया जाना।


...और उनका असर

:मल्टी स्टोरी बिल्डिंग्स में कारों के लिए समान जगह (ईसीएस) के हिसाब से पर्याप्त पार्किंग स्पेस मिलेगा।

:घर में पार्किंग स्पेस होगा तो सड़कों पर गाडिय़ां खड़ी नहीं होंगी, ट्रैफिक जाम नहीं होगा

:कमर्शियल लैंडयूज में ज्यादा पार्किंग का प्रस्ताव तैयार होने से पार्किंग प्रॉब्लम दूर होगी।


:ट्रैफिक जाम होने की नौबत नहीं आएगी। सड़कों पर ट्रैफिक तेज रफ्तार से चल सकेगा।

:मल्टीलेवल पार्किंग में निजी भागीदारी बढ़ेगी। नगरीय निकायों में संसाधन की कमी नहीं होगी।

वर्तमान पार्किंग दर- अभी नगर निगम पार्किंग की दरें तय करता है। इसमें प्रति चार घंटे में टू व्हीलर के लिए 2 रु. और फोर व्हीलर के लिए 5 रु. पार्किंग शुल्क है। पांच सालों से इसमें बढ़ोतरी नहीं हुई है।

राज्य शासन ने अपनी 100 दिवसीय कार्ययोजना में पार्किंग नीति को लागू करने का फैसला किया है। इसलिए विभाग जल्द ही इसके मसौदे को कैबिनेट में रखेगा।

कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री, नगरीय प्रशासन विभाग