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संतूर के तारों पर गूंजा राग जोग

8 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर भोपाल
स्टेट म्युजियम में हिंदुस्तान आर्ट एंड म्यूजिक फाउंडेशन और मध्य प्रदेश संस्कृति संचालनालय की ओर से आयोजित ‘भारत संस्कृति यात्रा’ समारोह का शुक्रवार शाम समापन हुआ। संगीत समारोह में प्रसिद्ध संतूर वादक पं. तरुण भट्टाचार्य ने संतूर वादन किया। वहीं शास्त्रीय गायिका पूनम सहाय ने तानपुरे की धुन पर मधुर राग और भजन को लयबद्ध किया। इसी क्रम में आलोकदास गुप्ता ने सितार वादन किया।
स्वर माला में पिरोए राग जोग : सुर-सरगम से सजी शाम की शुरूआत प. तरुण भट्टाचार्य ने अपने गुरु पं. रविशंकर के पसंदीदा राग जोग से की। उन्होंने झपताल में स्वरों की सुंदर प्रस्तुति दी। वहीं झाला में संतूर के तारों की तेज गति से निकले मधुर स्वरों की श्रोताओं ने अनुभूति की। दस मात्राओं में निबद्ध तीन ताल की प्रस्तुति अद्भुत रही। तबले पर सुपरिचित तबलावादक पं. प्रोसेनजीत पोद्दार ने संगत की। शास्त्रीय गायिका पूनम सहाय ने राग मारू विहाग में बंदिश पेश की। बंदिश ‘पैया तोरे लागे सैंया, जब सुधि आए तुम्हारी.....’ की तानपुरे की धुन पर प्रस्तुति दी। मध्यलय में छोटा खयाल ‘कल न पड़े ऐरी आली, पिया के बिना मोहे.....’ की मनमोहक छटा बिखेरी।
आखिर में भजन ‘ हे गोविंद राखो शरण.....’ के माध्यम से संगीत-आराधना आराध्य श्रीकृष्ण को समर्पित की।