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रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक व केंद्राध्यक्ष असल जिम्मेदार

8 वर्ष पहले
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भोपाल. बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की बीडीएस परीक्षा में हुई गड़बड़ी के लिए तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. संजय तिवारी, परीक्षा नियंत्रक डॉ. एसवीएस राजपूत व परीक्षा के केंद्राध्यक्ष प्रो. कालिका यादव जिम्मेदार हैं। राजभवन द्वारा मामले की जांच के लिए गठित जस्टिस एनके जैन कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है।

मई-जून 2013 में बीडीएस परीक्षा में हुई गड़बड़ी के साथ ही छात्रों को गलत तरीके से डिग्री देने के मामले की जांच के लिए राज्यपाल रामनरेश यादव ने 11 अक्टूबर 2013 को रिटायर्ड जस्टिस एनके जैन को जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसकी रिपोर्ट शुक्रवार को बीयू कार्यपरिषद ((ईसी)) की आपात बैठक में रखी गई।

उडऩदस्तों की भूमिका पर सवाल : रिपोर्ट में कहा गया कि उडऩदस्तों ने परीक्षाओं को लेकर विवि को जो रिपोर्ट दी थी, उसके अनुसार निरीक्षण के दौरान कोई गड़बड़ी नहीं मिली थी। इसका मतलब साफ है कि उडऩदस्ते ने अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं निभाई।

रिपोर्ट पर हंगामा, डिग्री के लिए विवि में चल रहा रैकेट

रिपोर्ट में कहा गया है कि छात्रों को हाथों हाथ डिग्री दिलाने के लिए रैकेट चल रहा है। इसके लिए विवि की व्यवस्था ही दोषी है, क्योंकि स्थापना के बाद से वहां केवल पांच या छह दीक्षांत समारोह ही हुए हैं।

मूल्यांकन में गड़बड़ी

मानसरोवर डेंटल कॉलेज में जो कॉपियां भेजी गईं, उनका मूल्यांकन अपात्रों ने किया। यह गड़बड़ी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. विनय कुमार ने दो कर्मचारियों सचिन जैन व बसंत वर्मा की मदद से की। इसमें विवि के सहायक ग्रेड ३ कर्मचारी हरभान सिंह सेंगर ने उनकी मदद की थी।

केंद्र बदलना न्यायसंगत नहीं

जस्टिस जैन ने रिपोर्ट में कहा है कि पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कॉलेज से परीक्षा का केंद्र हटाने में साजिश नजर आ रही है। हालांकि उन्होंने इसके लिए लागू नियमों का उल्लंघन नहीं किए जाने की बात भी कहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार किसकी-क्या भूमिका रही

रिपोर्ट को लेकर कार्यपरिषद की बैठक में हंगामा हो गया। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा जेएन कंसोटिया यह रिपोर्ट लेकर पहुंचे थे। इस पर परिषद के सदस्य अमित शर्मा ने रिपोर्ट लीक होने का आरोप लगाया। इस पर वहां हंगामा हो गया। इस दौरान शर्मा और कंसोटिया के बीच बहस भी हुई। इसके चलते कार्यपरिषद की बैठक शनिवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। बाद में भास्कर से चर्चा में कंसोटिया ने कहा कि यह राजभवन ही बता सकता है कि रिपोर्ट उन्हें क्यों दी गई थी।

बीडीएस गड़बड़ी - जस्टिस जैन कमेटी की रिपोर्ट में खुलासा

पर्यवेक्षकों की नियम विरुद्ध नियुक्ति की। पर्यवेक्षकों को नियुक्त करने का कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया था। यादव की लापरवाही का लाभ उठाकर पर्यवेक्षक अमृतलाल पाटले और ललित कुमार गुर्जर ने सेंटर से कॉपियां बाहर निकाल लीं। इन दोनों के ही पास सेंटर के कंट्रोल रूम का भी दायित्व था।

प्रो. कालिका यादव : अपात्र पर्यवेक्षक चुने

परीक्षा केंद्र की सुरक्षा को लेकर कोई पहल नहीं की थी। इस पद पर रहते हुए भी परीक्षा के काम की ठीक से निगरानी नहीं की। राजपूत इस सारी गड़बड़ी का आरोप तत्कालीन रजिस्ट्रार पर लगा रहे हैं। परीक्षा कराने के लिए विवि में कौन जिम्मेदार है, इसे लेकर भी अंत तक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई।

डॉ. एसवीएस राजपूत : सुरक्षा को लेकर लापरवाह

तिवारी के कार्यालय से चंद कदम की दूरी पर ही परीक्षा का केंद्र था, लेकिन वे एक भी बार वहां नहीं गए। वे परीक्षा पर नजर रखने में नाकाम रहे। तिवारी का कुलपति प्रो. निशा दुबे के साथ समन्वय न होने के चलते इस मामले के आरोपी विवि के सहायक ग्रेड तीन कर्मचारी हरभान सिंह सेंगर की गोपनीय शाखा में नियुक्तिजैसी गलती हो गई।