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महंगाई और भ्रष्टाचार बढ़ा रहे टैक्स : वोकिल

8 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता - भोपाल
सरकार, आयकर और वैट जैसे टैक्स खत्म कर केवल बैंकिंग लेनदेन पर टैक्स लगाए। इस टैक्स में केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों की हिस्सेदारी तय हो। विसंगतिपूर्ण टैक्स व्यवस्था महंगाई, भ्रष्टाचार और कालेधन की समस्या को बढ़ाती है।
इस तरह के टैक्स खत्म होने से कर चोरी कम होगी। नतीजतन सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए बार-बार टैक्स बढ़ाने और विदेशी निवेश बुलाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। यह बात बैंकिंग लेन-देन टैक्स व्यवस्था की परिकल्पना तैयार करने वाले पुणे के अर्थशास्त्री अनिल वोकिल ने कही। वे यहां छात्रशक्ति भवन में अपना प्रेजेंटेशन दे रहे थे। वोकिल ने कहा कि बैंकिंग ट्रांजेक्शन पर दो फीसदी टैक्स लगाकर सरकार अपनी राजस्व जरूरतों को पूरा कर सकती है। हालांकि अपनी जरूरत के हिसाब से यह टैक्स सरकार कम-ज्यादा कर सकती है। यह टैक्स केवल पैसा लेने वाले पर लेगा।





यानी वेतनभोगी को माह में एक बार ही टैक्स देना होगा। पैसा लेकर वह व्यापारी से जब सामान खरीदेगा तो यह टैक्स व्यापारी पर लगेगा। उसे दोबारा टैक्स नहीं देना होगा। हालांकि यहां सरकार धन निकासी की एक सीमा तय करके, उससे ऊपर पैसा निकालने वाले पर टैक्स लगा सकती है। वोकिल ने कहा कि देश में कैश लेस लेनदेन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। ताकि ज्यादा से ज्यादा धन बैंकिंग चैनल में आ सके। वोकिल ने कहा कि इस व्यवस्था के अस्तित्व में आने के बाद भी सरकार को आयात शुल्क लगाए रखना चाहिए। ताकि देश में आने वाले अनावश्यक विदेशी सामान पर नियंत्रण रखा जा सके।
बॉक्स
बड़े मूल्य के नोट बंद हों
अमेरिका में प्रति व्यक्ति आय 40 हजार डॉलर है। वहां सबसे बड़ा मूल्य का नोट 100 डॉलर है। भारत में प्रति व्यक्ति आय 43 हजार रुपए है। लेकिन यहां 1000 रुपए का नोट चलन में है। सरकार को चाहिए कि वह 50 रुपए से बड़े नोट बंद करे। इसके साथ ही आरबीआई करंसी कम मात्रा में छापे।
क्या होगा फायदा
बड़े नोटों के चलन में होने से ब्लैकमनी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। दुनिया के विकसित देशों में कैश करंसी से ज्यादा धन बैंकों में है। लेकिन भारत में बैंकों से ज्यादा धन कैश के रूप में है। इस धन का उपयोग आतंकवादी समेत दूसरी गतिविधियों में किया जा रहा है।