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लोकसभा चुनाव के कारण फिर अटका भोपाल का मास्टर प्लान
नौ साल पहले खत्म हो चुका है पिछला मास्टर प्लान
कुलदीप सिंगोरिया - भोपाल
राजधानी का मास्टर प्लान कम से कम छह महीने और अटक गया है। लोकसभा चुनाव के पहले इसका मसौदा प्रकाशित नहीं हो पाएगा। सौ दिनों के अंदर सात शहरों के मास्टर प्लान लागू करने की तैयारी कर रही सरकार ने भोपाल को इस प्रक्रिया से अचानक अलग कर दिया है।
आवास एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव एसएन मिश्रा ने शुक्रवार को ग्वालियर के मास्टर प्लान को
लेकर आपत्तियों की सुनवाई की। वहीं इंदौर का मास्टर प्लान विभाग के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पास मंजूरी के लिए पहुंच गया है।
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भोपाल का मास्टर प्लान नौ साल पहले बनना था लेकिन बार-बार गलतियों और खामियों के कारण यह लगातार अटक रहा है। वर्तमान में 1995 में बना मास्टर प्लान प्रभावी है, जो वर्ष 2005 तक के लिए बना था। आवास एवं पर्यावरण विभाग की सौ दिवसीय कार्ययोजना में सात शहरों का मास्टर प्लान जारी करने के प्रस्ताव से उम्मीद बनी थी कि इस दौरान भोपाल के मास्टर प्लान को भी जारी कर दिया जाएगा। लेकिन विभाग के प्रमुख सचिव एसएन मिश्रा ने साफ कर दिया है कि हम किन्हीं सात शहरों के मास्टर प्लान जारी कर देंगे।
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बिना प्लानिंग के जारी हुईं 85 विकास अनुमतियां-
टीएंडसीपी के अधिकारी पुराने मास्टर प्लान के आधार पर परमिशन दे रहे हैं। यही नहीं निवेश क्षेत्र के बाहर राजधानी के पास ही धारा 172 में नई कॉलोनियों की परमिशन के लिए अभिमत दे रहे हैं। साथ ही पुराने मास्टर प्लान के बाद वर्ष 2006 में निवेश क्षेत्र बढ़ाया गया था। यहां भी धारा 16 के तहत परमिशन दे रहा है। अब तक करीब 85 विकास अनुमतियां जारी हो चुकी है, जबकि इस क्षेत्र की कोई प्लानिंग नहीं हुई है।
नौ साल से शहर का विकास बिना प्लान के हो रहा है। धारा 16 में परमिशन लेने में इतनी दिक्कतें हैं कि लोग प्लानिंग एरिया से बाहर जा रहे हैं। क्रेडाई का प्रतिनिधिमंडल मंत्री से मिला था तो हमें मास्टर प्लान के प्रकाशन का आश्वासन दिया गया था। अब फिर प्लान को रोका तो हमारी नई योजनाएं अटक जाएंगी।
-अजय मोहगांवकर, अध्यक्ष, क्रेडाई मप्र
इसलिए लोकसभा चुनाव
के बाद आएगा ड्राफ्ट
यदि अभी ड्राफ्ट जारी किया जाए तो फिर 30 दिन के भीतर दावे-आपत्ति बुलाई जाएगी। इनकी 60 दिन में सुनवाई होगी और फिर 90 दिन के अंदर टीएंडसीपी कमिश्नर इसे अंतिम रूप देकर शासन को भेजेगा। इस तरह इसमें कम से कम छह महीने लग जाएंगे। इस बीच लोकसभा चुनाव के कारण शासन इसे लागू नहीं कर पाएगा।
॥मास्टर प्लान का प्रकाशन करने से लेकर इसे लागू करने की प्रक्रिया काफी लंबी
है। लोकसभा चुनाव के कारण आचार संहिता में मसौदे पर आपत्ति-सुनवाई नहीं हो पाएगी। लिहाजा, अब लोकसभा चुनाव के बाद ही मास्टर प्लान का प्रकाशन किया जाएगा।
-कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री, आवास एवं पर्यावरण विभाग
इन प्रावधानों के विरोध
की आशंका-
1. बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया में निर्माण की अनुमति।
2. शहर के सघन घनत्व वाले दक्षिणी इलाके में सुपर कॉरिडोर का प्रावधान।
3. शहर के बीच के हिस्से में बहुमंजिला इमारतों की अनुमति नहीं।
4. ढलान वाले पहाड़ी इलाकों में निर्माण की अनुमति।
पिछले आठ साल में नए मास्टर प्लान के लिए तीन बार मसौदा तैयार हो चुका है। वर्ष 2031 तक की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए नए मास्टर प्लान में शहर के विकास की तस्वीर तैयार होनी है। तीसरा मसौदा भी एक साल पहले तैयार हो गया था लेकिन उसका प्रकाशन नहीं हो सका। पहले विधानसभा चुनाव की आड़ में इसे रोका गया, अब आने वाले लोकसभा चुनाव के कारण इसे टाला जा रहा है। दरअसल, नए मास्टर प्लान के कुछ प्रावधानों को लेकर होने वाले विरोध को देखते हुए सरकार इसे लागू करने का साहस नहीं जुटा पा रही है।
आठ साल में तीन बार तैयार हो चुका है मसौदा
एक साल से ड्राफ्ट बनकर तैयार लेकिन टीएंडसीपी नहीं कर रहा है प्रकाशन