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तीन सौ विकलांगों को बनाया आत्मनिर्भर

8 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर भोपाल
शहर के 59 वर्षीय सरदार खान सैकड़ों विकलांग बच्चों को आत्मनिर्भर बनाकर आत्मसम्मान से जीना सिखा रहे हैं। पेशे से टेलर सरदार इन दिनों 40 बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई रोजगारपरक चीजें सिखा हैं। अब तक वे 300 विकलांग बच्चों को आत्मनिर्भर बना चुके हैं। वे कोहेफिजा इलाके में स्कूल की स्थापना करके पांचवीं तक की शिक्षा बच्चों को देते हैं। इस काम में सरदार खान का पूरा परिवार लगा है। अब तक उनके द्वारा ट्रेन किए गए 100 बच्चे नौकरी कर अपने परिवार का भरणपोषण भी कर रहे हैं। सरदार अपनी पैतृक संपत्ति और दोस्तों की मदद से बच्चों की परवरिश और पढ़ाई का प्रबंध कर रहे हैं। 1978 से ये सिलसिला चल रहा है। वे अब तक 70 गरीब लड़कियों की शादी भी करवा चुके हैं।



आम लोगों की जिंदगी को दिया खास मुकाम

शहर में कुछ ऐसे लोग हैं जो बेसहारा वर्ग को समाज की मुख्य धारा से जोडऩे के लिए प्रयासरत हैं। ...और कुछ युवा ऐसे भी हैं जो अपनी एक्टिविटीज के जरिए सिटी का नाम देश के कोने-कोने तक पहुंचा रहे हैं। इन्हीं लोगों पर केंद्रित सिटी भास्कर की रिपब्लिक डे स्पेशल रिपोर्ट...

मीना पवैया

मीना पवैया होममेकर हैं। शादी के बाद उन्हें महसूस हुआ कि सिर्फ घर-परिवार तक सीमित रहने के बजाय कुछ ऐसा किया जाए, जिससे दूसरों का भला हो। उन्होंने कैंसर जैसी गंभीर को अपना मुद्दा बनाया और लोगों को अवेयर करने के लिए अवेयरनेस कैंप आयोजित करने लगीं। वे अब तक दर्जनों ऐसे कैंप लगा चुकी हैं। उनके प्रयासों से 500 से भी अधिक लोग लाभांवित हो चुके हैं। जवाहर लाल नेहरू कैंसर हॉस्पिटल और अन्य अस्पतालों के साथ मिलकर वे लोगों का कैंसर चेकअप आधी कीमत पर कराती हैं। उनके लगाए कैंप्स के जरिए छह लोगों को कैंसर डिटेक्ट हुआ और सात लोगों को फॉलो-अप कराने को कहा गया। मीना गणतंत्र दिवस के मौके पर चौक स्थित धर्मशाला में ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन कर रही हैं।

सरदार खान