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रिपोर्ट दर्ज न करने पर पीडि़त को क्षतिपूर्ति देने की अनुशंसा
नगर संवाददाता.भोपाल
मप्र मानवाधिकार आयोग ने मारपीट के मामले में रातीबड़ थाने के तत्कालीन हेड कांस्टेबल सरमनलाल प्रजापति को कर्तव्य पालन न करने तथा पीडि़त के मानवाधिकार हनन का दोषी पाया है। आयोग ने सरकार से सिफारिश की है कि वह पीडि़त को 15 हजार रुपए की अंतरिम राहत दे। इसकी वसूली प्रजापति से की जा सकती है।
रातीबड़ निवासी नितिन त्रिपाठी ने आयोग को बताया कि 17 सितंबर २०12 को उनकी कार को पड़ोसी अजब सिंह मारण ने अपनी कार से टक्कर मार दी। इसकी शिकायत करने पर उन्होंने उनके साथ मारपीट की। त्रिपाठी ने इसकी शिकायत रातीबड़ थाने में की थी तो ड्यूटी पर तैनात प्रजापति ने उनके आवेदन को गंभीरता से नहीं लिया। हेड कांस्टेबल ने त्रिपाठी के आवेदन की कॉपी अजब सिंह को दे दी। इसके चलते अजब ने फिर उनके साथ मारपीट की ।
करते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। पीडि़त ने कहा कि जब वह इसकी शिकायत करने थाने गया तो उसे वहां से भगा दिया गया। इस पर उन्होंने एसपी साउथ को शिकायत की थी। उनके निर्देशों को बाद एफआईआर दर्ज तो कर ली, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। सरमन फिलहाल डीआरपी लाइन में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर हैं। मामले पर बातचीत के लिए उनसे संपर्क नहीं हो सका।