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रूढिय़ों से मुक्त होकर करें अग्निहोत्र का प्रचार

7 वर्ष पहले
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नसं. भोपाल - पर्यावरण शुद्धिकरण में अग्निहोत्र का बेहद महत्व है। हमें खुली सोच और विचारधारा रखनी होगी, ताकि हम पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली रूढिय़ों से मुक्त होकर अग्निहोत्र का प्रचार करें।
यह बात श्री माधव आश्रम की संचालिका नलिनी माधवजी ने कही। वे संत हिरदाराम नगर स्थित आश्रम में सोमवार को ४१वीं प्रचारक सभा को संबोधित कर रहीं थीं। सभा में देशभर के अग्निहोत्र प्रचारक, कृषि वैज्ञानिक और किसान हिस्सा ले रहे हैं। इनका उद्देश्य जैविक खेती को अग्निहोत्र खेती की दिशा में मोडऩे के लिए प्रभावी रणनीति बनाना है। ये प्रचारक पर्यावरण और खान-पान की शुद्धता के लिए प्राचीन अग्निहोत्र यज्ञ के प्रचार का रोडमैप भी तैयार कर रहे हैं। प्रचारक विवेक पोतदार ने कहा कि दिनचर्या और खानपान में शुद्धता न होने के कारण मनुष्य आयु घट रही है। रासायनिक खाद के इस्तेमाल से पैदावार बढ़ाई जा रही है, लेकिन इसका सीधा असर सेहत पर पड़ रहा है। ये जहरीली सब्जियां और फल लोगों को बीमार कर रहे हैं।





उनका कहना है कि कम लागत में अधिक और शुद्ध पैदावार की गारंटी है अग्निहोत्र खेती। इसमें अग्निहोत्र यज्ञ की भस्म का इस्तेमाल खेतों में खाद के रूप में किया जाता है।

जून में शुरू होगा कॉल सेंटर

श्री माधव स्वामी पर्यावरण संरक्षण समिति, कानपुर के पंकज मिश्रा ने पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से अग्निहोत्र खेती की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अग्निहोत्र से खेती करने से लेकर अनाज की बिक्री तक की कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। देशभर के किसानों के लिए अग्निहोत्र कॉल सेंटर इसी साल जून में शुरू हो जाएगा।