तारों से जोड़े संस्कृति के लोकरंग
सिटी रिपोर्टर भोपाल
नर्मदा नदी के उद्गम और मंदिर के प्रतीक मंच की सीढिय़ों से उतरते गोंड जनजाति के कलाकार और इसी के साथ सुर लहरियों के रूप में तार वाद्यों से बहता संगीत। मध्यप्रदेश, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, छत्तीसगढ़ के कलाकारों के वाद्यों ने संस्कृति के तारों से श्रोताओं को जोड़ा। वंदे मातरम और राग मियां मल्हार की धुनों पर प्रस्तुति के साथ ही लोकरंग के मंच पर देश की लोकसंस्कृति का संगीत गूंजा। आदिवासी लोक कला एवं बोली विकास निगम, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद और मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित ‘लोकरंग’ की दूसरी शाम तार वाद्यों की प्रस्तुति ‘किंदरा’ हुई।
शंखनाद की ध्वनि के साथ ही ‘किंदरा’ प्रस्तुति शुरू हुई। संतूर, सरोद और सारंगी के सुरों को पखावज, तबले की संगत मिली और संगीत की नई इबारत लिखना शुरू हो गई। राग मियां मल्हार पर एक साथ 80 कलाकारों की जुगलबंदी ने संगीत धुनों की अनोखी प्रस्तुति को दर्शकों के सामने पेश किया। ‘मध्यप्रदेश गान...’ और ‘वंदे मातरम...’ की ध्वनियों को इन कलाकारों ने एक साथ जोड़ा और श्रोता संगीत के इस अनोखी जुगलबंदी को सुनते रहे।
दूसरी प्रस्तुति पंजाबी लोकगायिका सर्वजीत कौर की हुई। संगीत के जुगलबंदी के बाद सर्वजीत ने पंजाबी लोक गायन की छटा बिखेरी। कार्यक्रम में तीसरी प्रस्तुति इंडोनेशिया के लोककलाकारों की हुई। अंतिम प्रस्तुति रशियन बैंड ‘सिल्वर स्ट्रिंग’ की हुई। चार फीमेल आर्टिस्ट ने ड्रम, वॉयलिन और चेलो पर ब्रॉड वे म्यूजिक, मिशन इंपॉसिबल के साथ रशियन कंपोजिशन क्वात्रे प्रस्तुत की। सिल्वर स्ट्रिंग बैंड के मेंबर ने रहमान की कंपोजिशन ‘जय हो...’ को भी प्रस्तुत किया।
 राज्यपाल रामनरेश यादव से महाराजा अग्रसेन सम्मान २०११-१२ ग्रहण करते दैनिक भास्कर ग्रुप के चेयरमैन रमेश चन्द्र अग्रवाल। साथ है राज्यमंत्री सुरेन्द्र पटवा ((संस्कृति एवं पर्यटन))।
लोकरंग की दूसरी शाम किंदरा में तार वाद्य की प्रस्तुति के साथ पंजाबी लोक गायन, इंडोनेशिया के लोक नृत्य और रशियन बैंड की प्रस्तुति हुई।
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 पंजाबी लोक गायिका सर्वजीत कौर के गाने को इस तरह एन्जॉय किया पंजाबी डांस की कलाकारों ने। श्चद्धशह्लश: ह्यद्धड्डड्डठ्ठ ड्ढड्डद्धड्डस्रह्वह्म्