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तंबाकू गुटखा के बाद अब पान मसाले की बिक्री पर भी रोक का प्रस्ताव

7 वर्ष पहले
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रोहित श्रीवास्तव - भोपाल
प्रदेश में तंबाकूयुक्त गुटखा की बिक्री पर प्रतिबंध के करीब दो साल बाद अब डिब्बे और पाउच में बिकने वाले पान मसाले की बिक्री पर भी प्रतिबंध लग सकता है। पान मसाला में कैंसर को जन्म देने वाले पदार्थों की मौजूदगी के कारण विशेषज्ञों ने राज्य सरकार से इनकी बिक्री पर रोक लगाने की मांग की है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने एक कमेटी का गठन किया है।
यह कमेटी इस सप्ताह के आखिर तक प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रवीर कृष्ण को पान मसालों की जांच और उन पर रोक संबंधी सुझाव देगी। अधिकारियों के मुताबिक सुझाव कमेटी के सदस्यों ने पैक्ड और डिब्बा बंद पान मसाले की बिक्री पर रोक लगाने संबंधी सुझावों का ड्राफ्ट बना लिया है। इन सुझावों पर विधि विभाग की राय आने के बाद कमेटी अपना ड्राफ्ट स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को सौंपेगी। कमेटी में राज्य तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ के सलाहकार के अलावा स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, समाज कल्याण विभाग और कमिश्नर फूड सेफ्टी शामिल हैं।
मुंह के कैंसर का खतरा
जवाहरलाल नेहरू कैंसर हॉस्पिटल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. आरके पांडे ने बताया कि पान मसाला और मीठी सुपारी में मैग्नीशियम कार्बोनेट, एरीकोलिन, लैड, मर्करी और आर्सेनिक जैसे तत्व होते हैं। इसके लगातार सेवन से व्यक्ति को सबम्यूकस फाइब्रोसिस हो जाता है, जो कैंसर होने से पहले की स्टेज है। फाइब्रोसिस होने पर भी पान मसाला और सुपारी खाना बंद नहीं करने पर व्यक्ति को मुंह का कैंसर हो जाता है।
500 करोड़ का कारोबार
मप्र सरकार गुटखे पर 38 फीसदी और पान-मसाले पर 25.5 फीसदी टैक्स लेती है। इसके बाद भी उसे इसके जरिए हर साल महज 20-25 करोड़ रुपए का राजस्व ही मिलता है, क्योंकि इसका 90 फीसदी से ज्यादा कारोबार अवैध है। कारोबारियों के अनुसार मध्यप्रदेश में गुटखा और पान मसाले की सालाना बिक्री करीब 500 करोड़ रुपए की है।