ऑडियंस ने तालियों से मिलाई ताल
सिटी रिपोर्टर भोपाल
वेस्टर्न म्यूजिक की परफॉर्मेंस में ऑडियंस भी सिंगर या डांसर के साथ सुर में सुर या ताल मिलाती है, लेकिन भारतीय शास्त्रीय गायन और वादन में ऐसे कम ही मौके आते हैं। मंगलवार को लोकरंग के तहत हुई घटम वादन की प्रस्तुति एकदम निराली रही। 73 वर्षीय घटम वादक विक्कू विनायकरम अपने चार मिट्टी के घड़ों पर ताल और आवाज देते और साथ में ऑडियंस को इशारे से बताते कि कितनी बार तालियां बजानी है। अलग-अलग ताल देते हुए श्रोताओं से भी उसी ताल में तालियां बजवा रहे थे। शास्त्रीय वादन की यह प्रस्तुति सभी परफॉर्मेंस में सबसे खास रही। हाल में ही विक्कू विनायकरम को पद्म भूषण अवॉर्ड भी घोषित हुआ है और इससे पहले उन्हें साल 2002 में पद्मश्री भी मिल चुका है। उनके पोते स्वामी नाथन ने अपने दादा का खंजीरा वाद्ययंत्र पर साथ दिया और साथ में तमिल-संस्कृत श्लोक का गायन भी किया। उनके साथ तबिल((दक्षिण भारतीय ढोल)) पर राजा रमन और एस गणेशन ने मुंह से बजाए जाने वाले वाद्ययंत्र मोरसिंह पर संगत दी।
कुंभ में विभिन्न राज्यों के लोकनृत्य...
प्रदेश की प्रस्तुति की बात करें तो लोक नृत्य की अलग शैली यहां देखने को मिली। लोक खेल नृत्य जिसमें खेल के सामान के साथ नौरता नृत्य किया गया।
सागर जिले में किया जाने वाला यह नृत्य कुंआरी कन्या नवरात्रे के समय करती हैं। नृत्य के माध्यम से धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है। ग्रुप लीडर रचना तिवारी ने बताया कि ढोल, लोटा, रमतूला और बांसुरी जैसे वाद्ययंत्र इस नृत्य में संगत के लिए होते हैं। लक्षद्वीप के मिनीकॉए आइलैंड पर किया जाने वाला बांदिया नृत्य शादी के बाद पति के घर से पहली बार पानी भरने की रस्म के दौरान किया जाता है। इस लोकनृत्य के बोल हैं, शुकनेह हेन बांदू माकटगा...।
करताल और ढोल की धुन पर यह नृत्य किया जाता है। इसके अलावा बिहार का झिनिया लोक नृत्य भी प्रस्तुत किया गया। ग्रुप लीडर प्रेरणा मिश्रा ने बताया कि इंद्र देवता को प्रसन्न करने के लिए बिहार में यह नृत्य किया जाता है।
 विक्कू विनायकरम
लोकरंग में मंगलवार शाम हुईं कई प्रस्तुतियां।
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