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डाउनलोड करेंभोपाल. व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के अधिकारियों ने पीएमटी पास कराने और नकल कराने के लिए कोई फिक्स रेट तय नहीं किया था, बल्कि ग्राहक की माली हालत के आधार पर सौदा तय होता था। परीक्षा में पास कराने के लिए उम्मीदवार से 10 से 20 लाख रुपए और रोल नंबर सेट करने के लिए एक से ढाई लाख रुपए प्रति उम्मीदवार लिए जाते थे। यह खुलासा बुधवार को सीजेएम पंकज माहेश्वरी की कोर्ट में एसटीएफ द्वारा पीएमटी 2012 के पेश किए गए चालान में हुआ है।
व्यापमं के अधिकारी ग्राहक की आर्थिक स्थिति और पीएमटी की तारीख में बचे दिनों के हिसाब से सौदा तय करते थे। व्यापमं के प्रिंसिपल सिस्टम एनालिस्ट नितिन महिंद्रा को ट्रेवल एजेंट तरंग शर्मा ने 6 लड़कों को पीएमटी 2012 में पास कराने के लिए 65 लाख रुपए और 20 स्टूडेंट्स और स्कोरर के रोल नंबर सेट करने के लिए १० लाख रुपए दिए थे। तरंग शर्मा को स्टूडेंट्स के ये रोल नंबर संतोष गुप्ता ने दिए थे।
शर्मा और महिंद्रा के बीच यह सौदा मार्च 2012 में हुआ था। वहीं अरविंदो मेडिकल कॉलेज, इंदौर के चेयरमैन डॉ. विनोद भंडारी से महिंद्रा ने मई के आखिरी सप्ताह में 6 लड़कों को पास करने का सौदा किया था। इसके लिए भंडारी से उसने 60 लाख रुपए लिए, जबकि जबलपुर के इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी राजेश असरानी से बेटी रवीना को पास करने के लिए 15 लाख रुपए लिए थे।
रुपए नहीं, काम नहीं
नितिन ने बताया कि उसके दोस्त डॉ. आशुतोष मेहता ने अपने साथी डॉ. ठाकुर को उसके पास भेजा था। वे अपने बेटे आशुतोष ठाकुर का नाम व रोल नंबर देकर पैसे बाद में देने की बात कहकर चले गए थे। लेकिन बाद में पैसे नहीं देने पर उनका काम नहीं किया था।
नितिन महिंद्रा ने एसटीएफ को दिए बयान में अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के बच्चों को भी पीएमटी पास कराने की बात कबूली है। नितिन ने बताया है कि उसके बचपन के दोस्त धीरज जैन ने अपनी बेटी चित्रांगना का नाम व रोल नंबर देकर उसे पास कराने के लिए 20 लाख रुपए नगद दिए थे।
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