मिलेगी ६ सिग्मा, काइजन की ट्रेनिंग
सिटी रिपोर्टर भोपाल
इंडस्ट्री में अब प्रोडक्ट क्वालिटी के साथ वर्किंग में भी क्वालिटी को महत्व दिया जाने लगा है। गुड्स क्वालिटी के साथ-साथ प्रोसेस क्वालिटी पर कंपनियंा फोकस कर रही हैं। प्रोडक्शन, इंजीनियंिरंग के साथ मैनेजमेंट और पब्लिक सेक्टर में क्वालिटी इंप्रूव करने के लिए मध्यप्रदेश में पहली बार क्वालिटी कोर्सेस शुरू किए जा रहे हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ क्वालिटी मैनेजमेंट एंड रिसर्च ((आईक्यूएमआर)) भोपाल में अप्रैल से ये कोर्सेस शुरू करेगा। कोर्सेस में आईक्यूएमआर के नॉलेज पार्टनर नेशनल बोर्ड फॉर क्वालिटी प्रमोशन- क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया, क्रिस्प और एमपीकॉन हैं। इन कोर्से में रजिस्ट्रेशन की प्रोसेस शुरू हो चुकी है। अभी तक सिर्फ अहमदाबाद, जयपुर((इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्वालिटी मैनेजमेंट)) में ही इन कोर्सेज की ट्रेनिंग दी जाती थी। अब वर्किंग क्वालिटी ((प्रोसेस क्वालिटी)) को इंप्रूव करने आईक्यूएमआर एमपीकॉन के साथ मिलकर सिटी के स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग देगा।
शुरू में देंगे बेसिक ट्रेंिनंग
आईक्यूएमआर के प्लानिंग और कॉर्डिनेशन हेड सुनील देशपांडे ने बताया कि पहले स्टूडेंट्स को क्वालिटी के इन कोर्सेस की बेसिक ट्रेनिंग दी जाएगी। इनमें क्वालिटी के स्थापित मॉडल जैसे काइजन, 6 सिग्मा आदि की ट्रेनिंग दी जाएगी।
6 सिग्मा : 6 सिग्मा क्वालिटी का एडवांस मॉडल है। इसमें प्रोसेस के दौरान होने वाली गलतियों को व्यवस्थित तरीकों से ढूंढा जाता है। उसके बाद इसे सुधारा जाता है, जिन कंपनियों में एंप्लॉइज की संख्या लाखों में होती है वहां 6 सिग्मा मॉडल को फॉलो किया जाता है। मुंबई डब्बा वाला इसके मॉडल के फॉलोअर हैं।
टीक्यूसी : टोटल क्वालिटी कंट्रोल क्वालिटी को इंप्रूव करने का फेमस मॉडल है। इसमें मैनेजीरियल एक्सीलेंस का उपयोग करते हुए एंप्लॉईज के बिहेवियर चेंज और एटीट्यूड बदलाव को शामिल किया जाता है। इस मॉडल में इनोवेशन को बढ़ावा देते हुए काम की क्वालिटी को सुधारने के साथ रिव्यू भी किया जाता है।
काइजन : कंटीन्युअल इंप्रूवमेंट के लिए काइजन मॉडल को फॉलो किया जाता है। इसे ज्यादातर मैन्युफेक्चरिंग, बिजनेस मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग में फॉलो किया जाता है। इसके साथ ही हेल्थकेयर, गवर्मेंट और बैंकिंग सेक्टर में भी इसके अच्छे रिजल्ट्स देखने को मिलते हैं।
5 एस : 5 एस क्वालिटी इंप्रूव करने का जापानी मॉडल है। इसमें 5 एस से मतलब शॉर्ट, सेट इन ऑर्डर, शाइन, स्टैंडराइज और सस्टेन से है। क्वालिटी इंप्रूव करने का जापानी मॉडल में वर्कप्लेस को साफ रखने के साथ ही प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और सेफ्टी फीचर्स के बारे में भी सिखाया जाता है।
कंपनियां देंगी वेटेज
एमपीकॉन के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर प्रवीण आचार्य ने बताया कि क्वालिटी कोर्सेस करने से वर्किंग क्वालिटी तो इंप्रूव होती है। साथ ही स्टूडेेंट्स इन कोर्स को करके प्लेसमेंट में वेटेज पा सकते हैं। प्रोडक्शन के क्षेत्र में काम कर रही कंपनियां इन कोर्स को करने वाले स्टूडेंट्स को एक्स्ट्रा प्रिविलेज देती हैं। वहीं एमपीकॉन के एमडी सुरजीत रॉय ने बताया कि एमपीकॉन स्टूडेंट्स को ‘क्वालिटी’ पर प्रोजेक्ट बनाने के लिए भी मदद करेगा। जो स्टूडेंट्स सिर्फ ‘प्रोसेस क्वालिटी’ पर वर्क करना चाहते हैं वे एमपीकॉन में कॉन्टेक्ट कर सकते हैं। इसमें स्टूडेंट्स को गाइड करने के साथ ही क्वालिटी में करियर संबंधी गाइडेंस भी प्रदान किया जाएगा।
एमपीकॉन और आईक्यूएमआर देगा सर्टिफिकेट
इन कोर्सेज को इंस्टीट्यूट ऑफ क्वालिटी मैनेजमेंट एंड रिसर्च और एमपीकॉन सर्टिफिकेट प्रदान करेगा। इन कोर्सेस में ट्रेनिंग देने के लिए इंडस्ट्री में क्वालिटी पर काम कर रहे स्पेशलिस्ट के साथ रिटायर्ड पर्सन स्टूडेंट्स को ट्रेंन करेंगे। इनमें आईक्यूएमआर के प्रिंसिपल एडवाइजर सीएस बोराटे, एचईजी से रिटायर्ड अधिकारी केके पुरी, सुनील देशपांडे स्टूडेंट्स को क्वालिटी पर ट्रेंड करेंगे। कोर्से के संबंध में ज्यादा जानकारी के लिए सुनील देशपांडे से द्बह्नद्वह्म्ड्ढश्चद्यञ्चद्दद्वड्डद्बद्य.ष्शद्व पर कॉन्टैक्ट किया जा सकता है।
ये कोर्स होंगे शुरू
आईक्यूएमआर शुरू में 4 कोर्स शुरू कर रहा है। इसमें 6 सिग्मा, 5 एस, टीक्यूसी और काइजन कोर्स होंगे। प्रोसेस क्वालिटी पर फोकस करने के लिए बेसिक कोर्स 2 से 3 दिन के हैं वहीं लांग टर्म कोर्स की अवधि 3 महीने की होगी। बेसिक शॉर्ट टर्म कोर्सेस की फी 2 से 3 हजार रु. है। वहीं लॉन्ग टर्म कोर्सेस की फी 10 से 15 हजार रु. है। इसमें इंडस्टूडेंट्स के साथ-साथ वर्किंग प्रोफेशनल्स भी इन कोर्सेस को कर सकते हैं।
आईक्यूएमआर मप्र में पहली बार स्टूडेंट्स के लिए क्वालिटी कोर्सेस शुरू करने जा रहा है। ये कोर्सेस अप्रैल से शुरू होंगे, इनके लिए रजिस्ट््रेशन शुरू हो चुके हैं।
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