इंद्रधनुषी रंग से सजा लोकरंग
सिटी रिपोर्टर भोपाल
लोकसंस्कृति के इंद्रधनुषी रंग की कलाकारों ने मुक्ताकाश मंच पर अनूठी छटा बिखेरी। लोक जीवनशैली और परंपराओं को गीत-संगीत के साथ बुधवार को ‘लोकरंग’ उत्सव में प्रस्तुत किया गया। उत्सव में विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी। उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने झूमर नृत्य के साथ लोकरंग की सुनहरी शाम की शुरूआत की। झूमर नृत्य में एक नववधू की कहानी को प्रस्तुत किया जाता है। इसको गीत के बोल ‘पीपर के पात झरजाला आंगनवा कैसे बहारू जी....’ थे।
इसी क्रम में लक्षद्वीप के मिनीकॉए आइलैंड के कलाकारों ने लावा नृत्य प्रस्तुत किया। यह पारंपरिक नृत्य ईद के पर्व पर किया जाता है। कलाकारों की टोली एक गांव से नृत्य शुरू करती है। क्रमवार यह टोली आइलैंड के सभी दस गांवों में नाचती-गाती घूमती है। वहीं गोवा के समई नृत्य में दीपों की सजावट को प्रस्तुत किया। कलाकार दीपस्तंभ के आकार में खड़े हुए। ब्रास के दीपों को प्रजज्वलित कर नृत्य किया गया। दिवाली, होली उत्सव पर यह नृत्य किया जाता है।
बिहार राज्य में किया जाने वाले सोहर लोकनृत्य की भारत भारतीय नृत्य नाट्य संगीत प्रशिक्षण संस्थान के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। आठ कलाकारों के समूह ने ‘जन्में हैं कुंवर कन्हैया, अवध में बाजे बधैया....’ गीत पर समा बांधा। इसके बाद पंजाब के कलाकारों ने जिंदुआ प्रस्तुत किया। ग्रुप लीडर गुरिंदर सिंह ने बताया कि बैसाखी और लोहड़ी उत्सव पर जिंदुआ डांस किया जाता है। साथ ही मध्यप्रदेश की भारिया जनजाति के लोकनृत्य भड़म और ओडि़शा का रणपा नृत्य भी कार्यक्रम में प्रस्तुत किया गया।
लोकरंग उत्सव में बुधवार को 9 राज्यों के कलाकारों ने लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी।
 पंजाब का जिंदुआ नृत्य प्रस्तुत करतीं कलाकार। यह बैसाखी, लोहड़ी के अवसर पर होता है।
 गोवा का समई नृत्य जो दिवाली और होली के समय होता है