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अवैध नल कनेक्शन होंगे वैध

7 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता - भोपाल
शहर में 50 हजार अवैध नल कनेक्शन को वैध करने की नीति को एमआईसी ने स्वीकृति दी है। इसके तहत कनेक्शन को वैध कराने के लिए एक साल का बिल और एक हजार से लेकर पांच हजार रुपए तक जमा कराने होंगे। इसके बाद निगम कनेक्शन को वैध करेगा। महापौर परिषद ने बुधवार को इसकी मंजूरी दे दी है। बैठक में न्यू मार्केट, एमपी नगर और संत हिरदाराम नगर में मल्टीलेवल पार्किंग के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। नगर निगम यहां पीपीपी की बजाए खुद पार्किंग का निर्माण करेगा। इसके लिए जल्द टेंडर जारी होंगे।
बैठक में एमआईसी ने 9 फैसलों पर मंजूरी दी। एमआईसी सदस्यों ने निगम अधिकारियों के प्रमोशन में अनियमितता का सवाल भी उठाया। एमआईसी सदस्यों का कहना था कि निगम ने बिना नियम के कर्मचारियों के प्रमोशन कर दिए हैं। इन्हें निरस्त किया जाना चाहिए। महापौर ने इनकी जांच के निर्देश दिए हैं। एमआईसी ने संपत्ति कर समेत अन्य करों को यथावत रखने का प्रस्ताव मंजूर किया।




ये निर्णय भी हुए

:नगर निगम सीमा बढ़ाकर 74 गांवों को शामिल करना।

: घर-घर से कचरा उठाने के लिए प्रति रैगपीकर्स को 200 से 250 घर का कचरा उठाना अनिवार्य।

: राजाभोज ब्रिज पर टोल टैक्स वसूलने के लिए 45 लाख रुपए का ठेका मंजूर करना।

एमआईसी के फैसले और असर



व्यावसायिक अवैध नल कनेक्शन को वैध करने के लिए चुकानी होगी यह राशि

आधा इंच नल कनेक्शन 2000 रुपए

पौन इंच नल कनेक्शन 3000 रुपए

एक इंच नल कनेक्शन 4000 रुपए

एक इंच से ज्यादा का कनेक्शन 5000 रुपए

आवासीय अवैध नल कनेक्शन को वैध करने के लिए तय राशि

आधा इंच नल कनेक्शन 1000 रुपए

पौन इंच नल कनेक्शन 1500 रुपए

एक इंच नल कनेक्शन 2000 रुपए

फैसले असर



एमआईसी बैठक - मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण खुद करेगा नगर निगम

जैविक कचरे के लिए 100 रुपए, अजैविक कचरे के लिए 200 और मिश्रित कचरे के लिए 150 रुपए प्रति टन का शुल्क देना होगा।



जैविक, अजैविक कचरे के लिए भी तय हुआ शुल्क

जिन संस्थानों से निगम कचरा नहीं उठा पाता है, वह संस्थाएं खुद ही खंती में कचरा भिजवा सकेंगी।



निजी संस्थाओं को भानपुर कचरा खंती में सीधे कचरा डालने की अनुमति मिलेगी



लीकेज पता करने में आसानी होगी। टंकियों में कितना पानी भर रहा है और कितना सप्लाई हो रहा है, जैसी जानकारी पता लग सकेगी।

62 नई पानी की टंकियों में मैग्नेटिक मीटर लगेंगे

निगम को सालाना तीन से चार करोड़ रुपए की आय होगी। शैक्षणिक संस्थाओं के आवासीय परिसर और अन्य कमर्शियल परिसर का टैक्स भी चुकाना होगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत निजी शैक्षणिक संस्थाओं को

संपत्ति कर में छूट, बाकी दूसरे टैक्स देने होंगे