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7 वर्ष पहले
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विशेष संवाददाता - भोपाल
प्रदेश के कई नगरीय निकायों ने स्टाम्प डयूटी लिए बगैर ही कॉलोनाइजर्स को मकान अथवा फ्लैट बनाने के लिए विकास की अनुमति जारी कर दी। इससे राज्य शासन को पिछले 9 माह में करीब 150 करोड़ रुपए की चपत लग चुकी है। इसको लेकर वाणिज्यिक कर ((कमर्शियल टैक्स)) विभाग ने नगरीय प्रशासन विभाग को कई पत्र लिखे, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। अब वित्त विभाग ने हस्तक्षेप किया तो कलेक्टरों व नगरीय निकायों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
मंत्रालय सूत्रों ने बताया कि नगर पालिका ((कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण निर्बधन तथा शर्तें)) नियम के अनुसार कॉलोनी अथवा अपार्टमेंट बनाने के लिए 25 प्रतिशत प्लॉट, मकान अथवा फ्लैट बंधक ((मॉडगेज)) रखने का प्रावधान था, लेकिन राज्य शासन ने 22 अप्रैल 2013 को नियम में संशोधन कर कॉलोनी अथवा अपार्टमेंट के आंतरिक विकास व्यय सुनिश्चित करने के लिए बैंक गारंटी देने का विकल्प जोड़ दिया। इसमें शर्त यह थी कि प्लॉट, मकान अथवा फ्लैट बंधक रखने के लिए स्टाम्प शुल्क अदा करने के बाद ही बंधक पत्र को मान्य किया जाएगा, लेकिन प्रदेश की अधिकांश निकायों में इस शर्त को दरकिनार कर विकास अनुज्ञा जारी कर दी गई। जब यह जानकारी महानिरीक्षक पंजीयक को मिली तो उन्होंने 8 नवंबर 2013 को एक पत्र नगरीय प्रशासन विभाग को लिखा। इतना ही नहीं, वाणिज्यिक कर विभाग ने दो पत्र लिखकर राजस्व क्षति होने की जानकारी दी।
अपर मुख्य सचिव वित्त ने बुलाई बैठक : बार-बार पत्र लिखने के बाद भी निकायों द्वारा बिना स्टाम्प डयूटी जमा किए विकास अनुज्ञा जारी रखने का सिलसिला नहीं रुका तो 17 जनवरी को अपर मुख्य सचिव वित्त अजय नाथ की अध्यक्षता में बैठक बुलाई गई। जिसमें वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव एपी श्रीवास्तव, नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव एसएन मिश्रा, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के आयुक्त गुलशन बामरा, महानिरीक्षक पंजीयन व अधीक्षक मुद्रांक दीपाली रस्तोगी और आयुक्त नगरीय प्रशासन शामिल हुए। बैठक में यह बात सामने आई कि राज्य शासन के नियम को दरकिनार करने से अब तक करीब 150 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है।



क्या है नियम

यदि कॉलोनाइजर जमीन का अनुबंध करता है तो कुल कीमत का एक प्रतिशत और निर्माण अनुज्ञा अनुबंध करता है तो तीन प्रतिशत स्टाम्प डयूटी चुकाने के बाद विकास अनुमति जारी होना चाहिए। इतना ही नहीं, बंधक प्लॉट के मामले में भी अनुबंध पत्र रजिस्टर्ड होना चाहिए।

नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा इस संबंध में नगर निगम आयुक्तों, नगर पालिकाओं व नगर पंचायतों के सीएमओ को नए निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अलावा कलेक्टरों को मॉनिटरिंग करने को कहा गया है। निर्देश में कहा गया है कि कॉलोनाइजर्स से निर्धारित स्टाम्प शुल्क लेकर ही विकास अनुज्ञा प्रदान करें।

कलेक्टर करेंगे मॉनिटरिंग

ञ्च9 माह में करीब 150 करोड़ की चपत लगने के बाद जागा राज्य शासन

ञ्चकलेक्टरों व नगरीय निकायों को जारी किए नए निर्देश

स्टाम्प ड्यूटी लिए बगैर ही दे रहे विकास अनुमति

॥प्रदेश के सभी निकायों को निर्देश जारी कर आवासीय कॉलोनियों के लिए प्रभावशील स्टाम्प शुल्क अदा कर रजिस्टर्ड कराए गए बंधक पत्रों को मान्य कर ही विकास अनुज्ञा जारी करने कहा गया है। इस नियम का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।ञ्जञ्ज

- एनएन मिश्रा, प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन विभाग