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संवेदनशील होने के साथ प्रभावी हैं कुंअर नारायण की कविताएं

7 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर भोपाल
कुंअर नारायण की कविताओं को सुनना हर किसी के लिए निजी अनुभव है। उनके लेखन की शुरुआत में लिखी कविताओं ने भी लोगों को बहुत प्रभावित किया है। कुंअर की ज्यादातर कविताएं जुबां पर हैं इसलिए उनकी कविताएं एक महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। बुधवार से भारत भवन में हिंदी के प्रसिद्ध कवि कुंअर नारायण पर आधारित ‘कुंअर नारायण प्रसंग’ शुरू हुआ। भारतीय कविता पर केंद्रित भारत भवन के केंद्र ‘वागर्थ’ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कुंअर नारायण के काव्य पाठ की रिकॉर्डिंग को सुनाया गया। इसके बाद कुंअर नारायण के जीवन पर केंद्रित फिल्म का प्रदर्शन हुआ। फिल्म में उनके लेखन में लखनऊ और दिल्ली के योगदान को दिखाया गया। शॉर्ट फिल्म में लेखन के साथ उनके जीवन और परिवार के बारे में भी बताया गया। कार्यक्रम में कुंअर नारायण पर परिचर्चा का आयोजन भी किया गया। मुख्य वक्ता रमेशचंद्र शाह ने कहा कि साहित्यकारों से अपेक्षा की जाती है कि उनकी कलम में संवेदनशीलता हो। कुंअर नारायण की कविता में बुद्धिमत्ता और संवेदनशीलता दोनों ही हंै। कार्यक्रम में कुंअर नारायण की कविताओं के संकलन ‘अबकी अगर लौटा तो’ का विमोचन भी हुआ।