लोकनृत्यों के साथ शुरू हुआ यूथ फेस्टिवल
सिटी रिपोर्टर भोपाल
राजस्थानी रंगत, पंजाब की लोहड़ी और आदिवासी परंपराओं से सजे नृत्यों को युवाओं ने उत्साह और उमंग के साथ प्रस्तुत किया। बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के ज्ञान-विज्ञान भवन में गुरुवार से ‘यूनिवर्सिटी लेवल पर यूथ फेस्टिवल’ की शुरूआत हुई। उत्सव में पहले दिन लोक नृत्य, एकल शास्त्रीय नृत्य, मिमिक्री, स्किट, स्पॉट पेंटिंग और क्ले मॉडलिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
भांगड़ा और कालबेलिया
के बिखरे रंग
राजस्थानी संस्कृति को अपने में समेटे लोक नृत्य कालबेलिया की प्रस्तुति शानदार रही। उत्सव में राजस्थान की खुशबू को श्री सत्यसाईं कॉलेज की छात्राओं ने मंच पर बिखेरा। ‘काल्या कूद पड़ो मेले में साइक ल पंचर कर लायो....’ लोक की गीत की धुन पर परफॉर्मेंस दी। इस प्रतियोगिता में आठ जिलों के स्टूडेंट्स ने पार्टिसिपेट किया। विभिन्न राज्यों की लोकपरंपराओं और संस्कृति से सराबोर रही सभी प्रस्तुतियां। इसी क्रम में राजगढ़ जिले के स्टूडेंट्स ने उतर प्रदेश के ‘रास’ नृत्य की प्रस्तुति दी। ‘मीठे रस से भरी ओजी राधा रानी लागे....’ गीत पर यमुना नदी के किनारे राधा और गोपियों के साथ श्रीकृष्ण के अटखेलियों के दृश्य को नृत्य के रूप में प्रस्तुत किया। वहीं विदिशा के गवर्नमेंट गल्र्स कॉलेज की स्टूडेंट्स ने भांगड़ा की परफॉर्मेंस दी। आदिवासी लोक नृत्य को सीहोर जिले के स्टूडेंट्स ने पेश किया।
कथक से शुरूआत
एकल शास्त्रीय नृत्य प्रतियोगिता की शुरुआत कथक से शुरू हुई। होशंगाबाद होम साइंस कॉलेज की स्टूडेंट शिखा गुप्ता ने कथक नृत्य प्रस्तुत किया। परंपरागत कथक में तोड़े, आमद और सलामी पेश की। वहीं भावाभिनय, पदचाप और हस्तमुद्राओं के कुशल प्रदर्शन से प्रस्तुति को रोचक अंदाज में पेश किया।मिमिक्री कॉम्पिटीशन में स्टूडेंट्स ने राजनेताओं और फिल्म अभिनेताओं के भूमिका में ऑडियंस को खूब हंसाया। इसमें चार जिलों के स्टूडेंट्स ने भाग लिया। वहीं स्पॉट पेंटिंग प्रतियोगिता में आम आदमी की जीत को व्यक्त किया।
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