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सामाजिक जन चेतना के गीतों, नृत्य की प्रस्तुति

7 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर भोपाल
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नीकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च((एनआईटीटीटीआर)) में वनमाली सृजन पीठ एवं राज्य संसाधन केंद्र के आयोजन में हमारी सारी दुनिया, सामाजिक चेतना के गीतों की रंगारंग प्रस्तुति दी गई। मौका था, प्रदेश में जनआंदोलनों के सहयोगी समर्थक एवं पूर्व मुख्य सचिव शरदचंद्र बेहार के सम्मान समारोह का। उन्हें प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर श्री चौबे ने सम्मानित किया।
इस मौके पर कवि कथाकार संतोष चौबे की परिकल्पना को साकार रूप दिया रंगकर्मी मनोज नायर और नृत्यांगना क्षमा मालवीय ने। हमारी सारी दुनिया प्रस्तुति में कविता, कहानी, अभिनय का समावेश करते हुए मंच प्रस्तुति गढ़ी गई। इसमें 14 कविओं की रचनाओं को आधार बनाया गया। राजेश जोशी, संतौष कौशिक, महेंद्र नेह, सफदर हाशमी, इब्ने इन्शा आदि की सामाजिक चेतना जगाने वाली कविताएं प्रस्तुति के लिए चुनी गई। प्रस्तुति में बताया गया कि चमक-दमक के बीच हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि विकास एक पक्षीय नहीं हो सकता। हमें उन्हें भी शामिल करना होगा, जो कि विकास की प्रक्रिया में छूट गए हैं, तभी वास्तविक और संतुलित विकास होगा।
कविता नारी है सबला पर उसको अबला जाना.., हमारी सारी दुनिया ना देखो आसमान, हमीं से रोशन दुनिया, ना देखो आसमान..., उम्मीद का पैगाम देता यह नगमा सुर-ताल और अभिनय की हमजोली करता मंच पर साकार हुआ। सफदर हाशमी की कविता किताबें करती हैं बातें..., पढऩा सीखों, लिखना सीखो सहित अन्य कविताएं प्रस्ुतत की गईं। कमल जैन की प्रकाश परिकल्पना ने दृश्यों को प्रभावी बनाया। इस मौके राज्य संसाधन केंद्र के प्रभारी संदज सिंह सहित वनमाली सृजनपीठ के निदेशक विनय उपाध्याय भी उपस्थित रहे।