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पहले सुनीं, फिर सुनाईं कविताएं

7 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर. भोपाल
‘ट्यूनीशिया का कुआं, कुतुब का परिसर, लखनऊ, बाजार जहां जरूरतों का दम घुटता है’ प्रसिद्ध कवि कुंअर नारायण सिंह की इन कविताओं की ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनने के साथ ही ‘कुंअर नारायण प्रसंग’ के दूसरे दिन कविता पाठ हुआ। भारत भवन के अंतरंग में ‘कुंअर नारायण प्रसंग’ की दूसरी शाम लीलाधर जगूड़ी, प्रयाग शुक्ल, नरेश सक्सेना, यतीन्द्र मिश्र, पंकज चतुर्वेदी और गीत चतुर्वेदी का कविता पाठ हुआ। प्रसंग में गुरूवार को दोपहर के सत्र में ‘मिथक, आख्यान और कुंअर नारायण की कविता’ पर परिसंवाद का आयोजन भी किया गया। युवा कवि गीत चतुर्वेदी ने ‘कागज’ कविता से शुरूआत की। ‘चारों तरफ बिखरे हैं कागज-कागज की जिंदगी, इनके बीच झगड़ा नहीं हो...।’ ‘असंबद्ध- कितनी ही पीड़ाएं जिनके लिए कोई धुन नहीं।’ इसके साथ ही गीत ने अलौट, उल्का, आषाढ़ पानी का घूंट है, पर लोककथा कविताओं का पाठ किया। कवि और व्यंग्यकार पंकज चतुर्वेदी ने ‘उम्मीद’ कविता से पाठ किया। उम्मीद की पंक्तियां ‘जिसकी आंख में आंसू है उससे हमेशा उम्मीद है।’ ‘बहुराष्ट्रीय- बहुराष्ट्रीय कंपनियां नहीं गद्य भी बहुराष्ट्रीय हो सकता है।’ पंक्तियों में छिपे गहरे अर्थों को पंकज ने छोटी-छोटी कविताओं के साथ प्रस्तुत किया। ‘कृतज्ञता और नतमस्तक’ कविता की ‘सत्ता का यह स्वभाव नहीं कि वे योग्य को ही पुरस्कृत करें...’ लाइनें उन्होंने पढ़ीं। पंकज ने ‘तीन बातें, गोया, कमीनों का क्या है, सुंदरता और नैतिकता, पुरुषत्व एक उम्मीद, और सुंदर, याद आती है’ कविताओं का पाठ किया। यतीन्द्र मिश्र ने अपने कविता संग्रह ‘विभाष’ से कविताओं को पढ़ा। इसमें ‘एक ही आशय में तिरोहित, सम्मोहित आलोक, उलटवासी, रंग-सुरंग, मिनिएचर पेंटिंग, बाजार में खड़े होकर और कामना’ कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना ने ‘रंग’ कविता से शुरूआत की।‘ सुबह उठकर देखा तो आकाश लाल...रंगों से रंगा था, पड़ोसी ने कहा सारा आकाश हिंदू हो गया है। बरसात आने दो सारी धरती मुसलमान हो जाएगी’सुनाई।




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