परवान चढ़ा इबादत, प्रेम का रंग
सिटी रिपोर्टर भोपाल
लोकप्रिय भक्तिपद ‘वैष्णव जन को तेने कहिए’ ...और ‘रघुपति राघव राजाराम’ ...जैसे ही रवींद्र भवन के मुक्ताकाश मंच पर गूंजे तो वहां मौजूद श्रोता पूरी तरह भावभीनी श्रृद्धा से भर गए। मौका था राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि को समर्पित संगीत संध्या ‘पीर पराई जाने रे...‘ में सुप्रसिद्ध सूफी गायिका जिला खान के गायन का। पांच दिवसीय लोकरंग के समापन अवसर पर अपने खास अंदाज से वे श्रोताओं से मुखातिब हुईं और गायन का सिलसिला शुरू हुआ। श्रोताओं से गुफ्तगू करते हुए अपने गुरु, पिता सुप्रसिद्ध सितार वादक उस्ताद विलायत खां को नमन किया और फरमाया कि पिता जी अक्सर कहा करते थे कि शॉर्टकट की आदत हो गई तो रियाज नहीं कर पाओगे। अपनी विरासत के प्रति आदर का इजहार करते हुए उन्होंने गायन के सिलसिले को आगे बढ़ाया। अध्यात्म और प्रसन्नता के सुर भीने रंगों की संगीतमय शाम को भोपाल के संस्कारशील श्रोताओं ने पूरे अनुशासन और धैर्य के साथ सुना। इबादत और दिल को छू लेने वाले सूफियाना कलाम को जब जिला खान ने डूबकर गाया तो श्रोताओं ने तालियां से उनकी फनकारी का इस्तकबाल किया। गायन के दौरान श्रोताओं के बीच आकर उन्होंने श्रोताओं को भी सुर मिलाने को कहा। वे कभी कुर्सी में बैठे श्रोताओं के बीच पहुंची तो कभी एंट्रेस गेट पर खड़े श्रोताओं के। श्रोताओं में डीजी जेल सुरेंद्र सिंह से उन्होंने गाने को कहा तो किसी ने कहा कि ये तो डीजी साहब हैं, तो जिला खान ने मस्ती भरे अंदाज में कहा कि आईजी-डीजी होंगे, यहां के आईजी-डीजी तो हम ही हैं। जिला खान के निवेदन पर डीजी साहब ने भी सुर मिलाते हुए ‘आज जाने की जिद न करो’...गुनगुनाया। इसके बाद उन्होंने छाप तिलक सब छीनी मोसे नैना मिलाइके..., केसरिया बालम पधारो म्हारे देस..., बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी....पिया रे पिया रे...गाकर माहौल को खुशगवार बना दिया। कार्यक्रम के पूर्व में उद्घोषक विनय उपाध्याय ने जिला खान की संगीत यात्रा पर अपने विशेष अंदाज में प्रकाश डाला।
कलाकार के बारे में
जिला खान सुविख्यात सितार वादक उस्ताद विलायत खां की बेटी हैं। जिला खान की बचपन से ही शास्त्रीय संगीत में गहरी रुचि रही। संगीत की प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने पिता से ही ग्रहण की। उन्होंने अपनी सभी संगीत रचनाओं को स्वयं तैयार किया है। वे अपने घराने की देश और दुनिया की पहली महिला गायिका हैं। उस्ताद विलायत खां के जीवन एवं संगीत यात्रा पर केंद्रित डाक्यूमेंट्री फिल्म ‘स्प्रिट टू सोल’ के लिए उन्हें वर्ष 2008 में सम्मानित भी किया गया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा द रोल ऑफ ऑनर्स अवार्ड, गालिब अवार्ड सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। वे 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में कल्चर एडवाइजर एवं आर्गेनाइजिंग कमेटी की सदस्य रहीं। महिलाओं के अधिकार और समानता के लिए विभिन्न देशों में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
 लोकरंग में गुरुवार को प्रस्तुति देतीं जिला खान।
रवींद्र भवन में ‘पीर पराई जाने रे’ संगीत संध्या में जिला खान का गायन...
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