• Hindi News
  • डायस कोड को बता दिया मान्यता

डायस कोड को बता दिया मान्यता

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
 भोपाल

स्कूल संचालक ने इंटरनेशनल कॉर्मल कॉन्वेंट के नाम से मान्यता लेने के लिए फंदा ब्लॉक बीआरसीसी के पास आवेदन किया था। उन्होंने प्रकरण जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय भेज दिया। यहां बात की तो पता चला कि इस नाम से आवेदन तो आया है, लेकिन मान्यता अभी नहीं हुई है। हां, डायस कोड जरूर जारी किया गया है। इस कोड के जारी होने के बाद ही कम्प्यूटर मान्यता का प्रकरण स्वीकार करता है और बाकी औपचारिकताएं हो पाती हैं।

एक ने प्रवेश तो दूसरे ने स्कूल शुरू किया

बंगरसिया की तरह ही ईंटखेड़ी में भी स्वामी विवेकानंद माध्यमिक स्कूल का संचालन किया जा रहा है। इस स्कूल को भी अभी तक मान्यता नहीं मिली है, लेकिन इसके बाद भी यहां सैकड़ों बच्चे अध्ययनरत हैं, जबकि मामले की जानकारी बीआरसीसी फंदा को भी है। जब बीआरसीसी फंदा रवींद्र जैन से दोनों ही स्कूलों के बारे में बात तो उन्होंने बताया कि बंगरसिया में खुलने वाले स्कूल का आवेदन आया है, जबकि ईंटखड़ी के स्कूल की मान्यता नहीं होने की जानकारी उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय भिजवा दी है। अब कार्रवाई वहीं से होगी।

निर्माणधीन बिल्डिंग, जिसे पूर्ण रूप से सुसज्जित बताया जा रहा है।

 एडमिशन के लिए प्रेशर बना रहे

श्रीकांत तिवारी हमारे यहां आए थे और कह रहे थे कि बच्चों का एडमिशन हमारे स्कूल में करवा लो। एडमिशन के लिए शुल्क 200 रुपए बता रहे थे और फिर कहने लगे देख लेंगे। ये भी कह रहे थे कि नीमखेड़ा गांव के बाकी बच्चों का भी एडमिशन वहां करवा दूं। हमने तो अभी मना कर दिया है।

महेश, निवासी नीमखेड़ा

 सख्त कार्रवाई होगी

कोई भी व्यक्ति बिना मान्यता के न तो स्कूल शुरू कर सकता है और न प्रवेश ले सकता है। जो भी ऐसा कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई करवाएंगे।

सीएम उपाध्याय, डीईओ भोपाल

 डीईओ को जानकारी भेजी है

हां, हमारे पास इस स्कूल के नाम से एक आवेदन आया था, लेकिन अभी मान्यता नहीं मिली है। केवल एक डायस कोड जारी किया गया है, यह मान्यता देने की कार्रवाई मात्र है। लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं है कि कोई मान्यता बताकर प्रवेश लेने लगे। इसके अलावा ईंटखेड़ी में चल रहे स्वामी विवेकानंद स्कूल की भी मान्यता नहीं है और इस बारें में मैंने लिखित में डीईओ को जानकारी दे दी है।

रवींद्र जैन, बीआरसीसी, ग्रामीण फंदा

 अभी तो आवेदन आ रहे हैं

अभी तो मान्यता का प्रश्न ही नहीं उठता है। 30 अप्रैल तक तो आवेदन ही आएंगे और इसके बाद मामला समिति के सामने जाएगा। फिर वेरीफिकेशन होगा और उसके बाद मान्यता जारी की जाएगी। जो भी व्यक्ति बिना मान्यता के प्रवेश दे रहा है, वह पैरेंट्स के साथ धोखा कर रहा है।

अविनाश, प्रभारी, मान्यता कक्ष संयुक्त संचालक कार्यालय भोपाल