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पश्चिमी के साथ नैतिक शिक्षा भी जरूरी: उपाध्याय
सिटी रिपोर्टर ग्वालियर
देश में पश्चिमी सभ्यता के आगे हमारी व्यवहारिक शिक्षा को नकारा जा रहा है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। हमारे मान व कौशल के जरिए ही मूल परख शिक्षा से सर्वांगीण विकास किया जा सकता है। यह बात उत्तराखंड से आए प्रो.शिशिर उपाध्याय ने कही। वे बुधवार को साइंस कॉलेज में शुरू हुई दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।
‘उच्च शिक्षा के अन्तर्गत सामाजिक, नैतिक एवं शैक्षणिक उत्थान का विश्लेषणात्मक अध्ययन’ विषय शुरू हुई कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि देश के आईआईटी, एनआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों से पढ़कर स्टूडेंट्स बाहर चले जाते हैं। इसका लाभ देश को नहीं मिल पाता है। इसका लाभ देश को मिले ऐसी योजना बनाने की जरूरत है। साथ ही शिक्षा का दायरा क्लासरूम से बाहर भी ले जाना होगा। शिक्षकों को भी अपनी क्वालिटी सुधारनी होगी। इस अवसर पर जिपं की सीईओ सूफिया फारूखी, प्रभारी अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ.कृष्णा सिंह, प्राचार्य डॉ.डीआर पवैया सहित देशभर से आए फैकल्टी उपस्थित रहे। इस दौरान 20 पेपर प्रस्तुत किए गए।
शिक्षा का दायरा क्लासरूम से बाहर भी ले जाना होगा। शिक्षकों को भी अपनी क्वालिटी सुधारनी होगी। इस अवसर पर जिपं की सीईओ सूफिया फारूखी, प्रभारी अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ.कृष्णा सिंह, प्राचार्य डॉ.डीआर पवैया सहित देशभर से आए फैकल्टी उपस्थित रहे। इस दौरान 20 पेपर प्रस्तुत किए गए।
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आईटीएम यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.योगेश उपाध्याय ने कहा कि हमें रिसर्च को प्रैक्टिकल बनाना होगा। देश में बेहतर उच्च शिक्षा के लिए अच्छे टैलेंट के लिए अच्छे संस्थान और प्रशासन की जरूरत है। इसका फायदा देश को मिलेगा। देश में उच्च शिक्षा का प्रतिशत बहुत कम है।
बनाना होगा
रिसर्च को प्रैक्टिकल
मुख्य वक्ता प्रो.शिशिर उपाध्याय ने कहा कि शिक्षा में फाइव डब्ल्यू एच थ्योरी जरूरी है। इसमें क्या पढ़ाना है, क्यों पढ़ाना है, कैसे पढ़ाना है, कौन पढ़ाएगा, कब पढ़ाया जाना और कैसे पढ़ाया जाना है। यह चीजें शामिल की जाएंगी तो शिक्षा के स्तर में सुधार होगा।
जरूरी है
फाइव डब्ल्यू एच थ्योरी
 साइंस कॉलेज में शुरू हुई नेशनल कॉन्फ्रेंस को संबोधित करतीं जिपं सीईओ सूफिया फारुखी।