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ऑफलाइन ही होंगे एडमिशनजेयू प्रशासन ने अध्ययनशालाओं में एडमिशन के मामले में लिया निर्णय

8 वर्ष पहले
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ग्वालियर. जीवाजी यूनिवर्सिटी की अध्ययनशालाओं में ऑनलाइन नहीं बल्कि ऑफलाइन माध्यम से ही एडमिशन होंगे। इस तरह का निर्णय जेयू प्रशासन ने लिया है। उच्च शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता को भी गत दिवस भोपाल में हुई बैठक में इस निर्णय से अवगत करा दिया गया है।

जेयू की अध्ययनशालाओं में संचालित प्रोफेशनल कोर्स में टेस्ट के माध्यम से एडमिशन होते हैं जबकि ट्रेडिशनल कोर्स में मेरिट के माध्यम से। उच्च शिक्षा विभाग ने यूनिवर्सिटी की अध्ययनशालाओं में ऑनलाइन एडमिशन प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे। परेशानी को देखते हुए जेयू प्रशासन ने विभाग को बताया कि अध्ययनशालाओं में वर्तमान व्यवस्था के तहत ही एडमिशन प्रक्रिया आयोजित की जाएगी। ज्ञात हो कि अध्ययनशालाओं में एडमिशन के लिए ऑनलाइन फॉर्म लिए जाते हैं लेकिन एडमिशन प्रक्रिया मेन्युअल ((ऑफलाइन)) होती है।

परफॉर्मेंस के आधार पर मिलेगी ग्रांट: उच्च शिक्षा मंत्री ने कुलपति व रजिस्ट्रारों की बैठक में साफ तौर पर कहा है कि यूनिवर्सिटी की परफॉर्मेंस के आधार पर ही ग्रांट प्रदान की जाएगी। जेयू को अभी विभाग की ओर से लगभग तीन करोड़ रुपए ग्रांट के तौर पर मिलते हैं, जो कि पर्याप्त नहीं है।

प्रो. मिश्रा को कार्यमुक्त करने के लिए कुलपति को लेटर का इंतजार
उच्च शिक्षा विभाग की ओर से रजिस्ट्रार प्रो. आनंद मिश्रा व एनएसएस के कोऑर्डीनेटर डॉ. दीपक शर्मा की प्रतिनियुक्ति खत्म कर दी गई है। इसके आदेश विभाग ने अपनी वेबसाइट पर जारी कर दिए हैं। हालांकि अभी दोनों ही अधिकारी रिलीव नहीं हुए हैं। कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला का कहना था कि अभी उन्हें इस मामले में कोई लेटर नहीं मिला है। लेटर मिलने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। जबकि रजिस्ट्रार का कहना था कि वह शासन के निर्देशों का पूरी तरह पालन करेंगे। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में जिन तीन रजिस्ट्रारों की प्रतिनियुक्तिखत्म करने के शासन ने आदेश जारी किए हैं। अब उसे उच्च शिक्षा विभाग वापस लेने पर विचार कर रहा है।

बदले जाएंगे कई वर्ष से एक ही विभाग में जमे अधिकारी-कर्मचारी
जेयू में वर्षों से एक ही विभाग में जमे अधिकारी व कर्मचारियों के विभाग बदलने के निर्देश उच्च शिक्षा मंत्री ने दिए हैं। मंत्री ने कहा है कि ऐसे कर्मचारी व अधिकारी जिनको एक शाखा में कार्य करते हुए तीन साल बीत चुके हैं। उनके विभाग बदले जाएं। ऐसे निर्देश विभाग की ओर से अगस्त में भी दिए गए थे लेकिन जीवाजी यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इसका अब तक पालन नहीं किया।