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रोजगार नहीं दिया तो भटक सकते हैं युवा

8 वर्ष पहले
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ग्वालियर. होम और कार लोन बांटने के लिए बैंक बड़े-बड़े होर्डिंग लगाते हैं, लेकिन एजुकेशन और स्वरोजगार के लिए लोन देने के होर्डिंग नहीं दिखते। अगर हम युवाओं को शिक्षा और रोजगार के लिए लोन नहीं देंगे तो वे दूसरे ((गलत)) रास्ते पर भी जा सकते हैं। इसके लिए हम ही जिम्मेदार होंगे। यह बात कलेक्टर पी. नरहरि ने कही। वे गुरुवार को होटल सेंट्रल पार्क में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, भोपाल के रूरल प्लानिंग क्रेडिट डवलपमेंट विभाग द्वारा माइक्रो-स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज ((एमएसएमई)) पर आयोजित टाउन हॉल मीटिंग में बोल रहे थे।

श्री नरहरि ने कहा कि आज स्थिति ये है कि युवा लोन लेने के लिए बैंकों के इतने चक्कर काट चुके हैं कि उनकी गाडिय़ों से शहर की सड़कों पर गहरे गड्ढे हो चुके हैं। इस मौके पर आरबीआई भोपाल से आईं डीजीएम ((रूरल प्लानिंग क्रेडिट डवलपमेंट)) रानी धुर्वे ने कहा कि छोटे उद्यमियों से ही बड़े उद्योगपति तैयार होते हैं। इसलिए आरबीआई का पूरा फोकस एमएसएमई सेक्टर पर है। इस अवसर पर एसबीआई के जीएम आरसी पांड्या ने भी संबोधित किया।


छोटी शुरुआत से आगे बढ़े

लोन की बदौलत शून्य से शिखर पर पहुंचे धनराज सेवानी को वर्ष 1991 में व्यवसाय का न तजुर्बा था और न ही फैमिली बैकग्राउंड। पांच सौ रुपए की एक दुकान किराए पर लेकर स्टेशनरी का व्यापार शुरू किया। विजन था आगे बढऩा और कुछ कर दिखाना। अब वे बड़े व्यवसायी बन चुके हैं। इसके लिए वे बैंकों का सहयोग और लोगों की कुशल सेवा को मानते हैं। यही कहानी अर्चना और ऋषि पाराशर की है। उन्होंने भी घर-घर जाकर सिलाई के लिए कपड़े मांगे। अब उनका सालाना कारोबार करीब छह लाख रुपए तक पहुंच गया है।

ग्वालियर से निर्यात की संभावनाएं

निर्यात को बढ़ावा देकर व आयात को कम कर हम अधिक विदेशी मुद्रा अर्जित कर सकते हैं। इससे देश का करंट अकाउंट डेफिसिट कम होगा और रुपया मजबूत होगा। विदेशी मुद्रा विभाग, भारतीय रिजर्व बैंक भोपाल द्वारा गुरुवार को फॉरेक्स फॉर यू विषय पर रीजेंसी में आयोजित सेमिनार में यह बात आरबीआई मुंबई से आए मुख्य महाप्रबंधक सीडी श्रीनिवासन ने कही। उन्होंने कहा कि ग्वालियर से निर्यात की व्यापक संभावनाएं हैं।

एमएसएमई की योजनाओं का प्रचार नहीं हुआ

एमएसएमई की योजनाओं का जैसा प्रचार होना चाहिए उतना नहीं किया गया है। परिणामस्वरूप छोटे उद्यमी को योजना की जानकारी ही नहीं है। यही कारण रहा कि माइक्रो-स्माल एंड मीडियम इंडस्ट्री का ग्वालियर में औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं हो पाया।

विष्णु गर्ग, अध्यक्ष चेंबर ऑफ कॉमर्स

उद्यमियों में जानकारी की कमी

जो लोग रोजगार लगाना चाहते हैं वे जानकारी न होने के कारण फार्म नहीं भर पाते। सीए सही ढंग से प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार नहीं करते, इससे लोन स्वीकृत करने में बैंकों को समय लगता है। इन सभी बातों को बैंक ही फेस करते हैं।

केपी सिन्हा, रीजनल मैनेजर सेंट्रल बैंक

हमें यहीं से उद्यमी तैयार करने होंगे

ग्वालियर-चंबल अंचल में रोजगार के प्रत्यक्ष अवसर कम हैं। इसलिए अप्रत्यक्ष अवसरों की ओर देखना होगा। हम बाहर से उद्यमी आयात नहीं कर सकते, इसलिए हमें यहीं से नए उद्यमी तैयार करने होंगे।

केके तिवारी, एमडी आईआईडीसी

इनोवेटिव प्रोडक्ट तैयार करें

अब वैश्विक स्तर पर प्रतियोगिता करनी है, इसलिए उद्यमी ट्रेडीशनल प्रोडक्ट को छोड़कर इनोवेटिव प्रोडक्ट तैयार करें, तभी हमें सफलता मिल सकती है।

डीएस मंडलोई, डायरेक्टर एमएसएमई