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इंग्लिश वोकेबलरी के लिए रोजाना लिखें बीस सेंटेंस
सिटी रिपोर्टर ग्वालियर
इंग्लिश पर ग्रीक, हिंदी और संस्कृत शब्दों का प्रभाव रहा है। इन्हीं शब्दों के समन्वय से इंग्लिश रोचक हुई है। यही वजह है कि इंग्लिश बोलने में ज्यादा दिक्कत नहीं आती, लेकिन लिखने में समस्या होती है। इंग्लिश में स्टूडेंट्स कई गलतियां कर जाते हैं। जबकि उन्हें शब्दों के सही मायने पता नहीं होते। इसलिए इंग्लिश में सुधार के लिए शब्दकोष पर स्टूडेंट्स की पकड़ होनी चाहिए।
यह बात केआरजी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ.ओपी बुधोलिया ने केआरजी कॉलेज में कही। वे शुक्रवार को एसेंड विथ इंग्लिश विषय पर आयोजित सात दिवसीय इंग्लिश इंप्रूवमेंट वर्कशॉप को संबोधित कर रहे थे। उन्होंनें कहा कि इंग्लिश केवल एक बार रटने या पढऩे से नहीं आएगी। इसका रोजाना दो घंटे नियमित अभ्यास जरूरी है। इसे लिखने की आदत डालनी चाहिए। कार्यक्रम में इंग्लिश डिपार्टमेंट की एचओडी डॉ. सविता श्रीवास्तव ने स्टूडेंट्स को लेंग्वेज इंप्रूवमेंट के टिप्स दिए। इस अवसर पर कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. अर्चना भारद्वाज, डॉ.सोनिया सिंह, डॉ वीना लाड़ आदि उपस्थित थे।
 केआरजी कॉलेज में आयोजित सेमिनार में संबोधित करते एक्सपर्ट। फोटो: भास्कर
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रीडिंग- इंग्लिश में पैसेज और टॉपिक्स को रोजाना एक घंटा पढ़ें। खासतौर से इंग्लिश न्यूजपेपर और मैग्जीन में इंपोर्टेंट और नए शब्दों को अंडरलाइन कर लें। इन्हें अपनी इंग्लिश में शामिल करने की कोशिश करें।
राइटिंग- स्पेलिंग मिस्टेक इंग्लिश में देखने में आती है। इसलिए स्पेलिंग सुधारने के लिए रोजाना बीस सेंटेंस अपने मन से इंग्लिश में लिखें। बाद में किसी सीनियर से कॉपी चैक कराएं। गल्तियों को सुधारने की कोशिश करें।
स्पोकन- अपने फ्रेंडसर्कल और कलीग से इंग्लिश में ही कनवर्जेशन रखे, लेकिन एक दिन से नहीं, इसके लिए रोजाना एटमॉस्फियर बनाना होगा। तभी इंग्लिश के सही एसेंट स्पोकन में आएंगे।
इंग्लिश में सुधार के तीन सूत्र