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गाइड लाइन में 90\' स्थानों पर नो चेंज

8 वर्ष पहले
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ग्वालियर. उप मूल्यांकन समिति ने शहर के 90 फीसदी इलाकों में जमीन की कीमतों में कोई वृद्धि नहीं की है। यहां पर जमीन के भाव चालू गाइड लाइन के मुताबिक ही रखे गए हैं। शेष 10 फीसदी क्षेत्रों में आंशिक वृद्धि ही हो रही है। दूसरी तरफ जिला मूल्यांकन समिति के सदस्य कुछ ऐसे शहरी क्षेत्रों में 5 से 10 फीसदी वृद्धि पर विचार कर रही है, जहां पर दस्तावेज पंजीयन अन्य क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा हैं।

पंजीयन विभाग ने शहर को नगर निगम की तरह 60 भागों में बांट रखा है। हर वार्ड में जमीन की कीमतें अलग-अलग हैं। उप मूल्यांकन समिति ने वर्ष 2014-15 की गाइड लाइन में वार्ड क्रमांक-1 से 14 तक जमीन की कीमतें यथावत ((वर्ष 2013-14 की तरह)) रखी हैं।

ठीक ऐसी ही स्थिति वार्ड 48 से 56 के बीच है। यहां पर भी कीमतों में कोई अंतर प्रस्तावित नहीं है। इस तरह 23 वार्ड क्षेत्र में जमीन की कीमतें अगले वर्ष की गाइड लाइन में स्थिर रह सकती हैं। उप मूल्यांकन समिति ने 37 वार्डों में कुछ वृद्धि प्रस्तावित की है पर यहां भी दस फीसदी हिस्सों में ही। इस बार गाइड लाइन में जमीन की कीमतें न बढऩे का फायदा उन लोगों को मिलेगा जो अगले वर्ष दस्तावेज पंजीयन कराना चाहते हैं। दूसरी तरफ जिला मूल्यांकन समिति के सदस्य कुछ ऐसे स्थानों को छांट रहे हैं, जहां पर दस्तावेज पंजीयन ज्यादा हो रहे हैं। ऐसे पंद्रह स्थानों पर अधिकतम दस फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव समिति दे सकती है।

इस बार सामान्य वृद्धि होगी

नई गाइड लाइन को अंतिम रूप देने के लिए अगले माह पहले सप्ताह में बैठक होगी। इस बार जमीन की कीमतों में सामान्य वृद्धि ही होगी। आपत्ति के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा।

पी. नरहरि, कलेक्टर एवं अध्यक्ष जिला मूल्यांकन समिति

दुकान-गोदाम क्षेत्रों में वृद्धि

शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में दुकान, गोदाम व दफ्तरों के दस्तावेज पर अब व्यावसायिक क्षेत्र से ज्यादा कीमत स्टाम्प ड्यूटी देनी होगी। ऐसा आवासीय क्षेत्र में कीमतें स्थिर रखने पर होने वाले घाटे की भरपाई के लिए किया जा रहा है। अब दुकान, गोदाम व दफ्तर वाले हिस्से में जमीन की कीमत एक हजार से पांच हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर तक बढ़ाई जा रही हैं।

फ्लैट में और मिल सकती है छूट

किसी भी क्षेत्र के फ्लैट में मंजिलों के आधार पर स्टाम्प ड्यूटी की व्यवस्था इस वर्ष से लागू हो सकती है। क्रेडाई की आपत्ति पर अब फ्लैट या बड़े बहुमंजिला भवनों के लिए आवासीय या व्यावसायिक क्षेत्र से कुछ कम जमीन की दरें तय हो सकती है। इससे मंजिलों पर मिलने वाली छूट की तरह कुछ और राहत दस्तावेज पंजीयन पर मिल सकती है।